सुबह किया गया विशेष अभिषेक
संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि भक्तों ने मंदिर में जाकर शनि महाराज का पंचामृत और सरसों के तेल से तैलाभिषेक किया। इस दिन काले तिल, नीले वस्त्र और सरसों के तेल का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मों के अनुसार फल देने वाला ग्रह माना जाता है। शनि की चाल बदलने पर कई राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शुरू या समाप्त होता है। जिन लोगों पर शनि का प्रभाव रहता है, उन्हें जीवन में कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि शनि जयंती के दिन शनि मंदिर में जाकर शनि चालीसा और शनि रक्षा स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। इससे शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में राहत मिल सकती है। कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को शनिदेव की आंखों में देखने के बजाय उनके चरणों के दर्शन करने चाहिए। इस दिन जरूरतमंदों को काले तिल, सरसों का तेल, कंबल और दक्षिणा दान करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे करियर, व्यापार और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

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