सीहोर। नवग्रह में भगवान शनिदेव को अपने इष्ट देव भगवान शंकर से आशीर्वाद प्राप्ति में न्यायधीश का दायित्व मिला है । न्यायाधीश शनिदेव तीनो लोको के प्राणियों के जीवन में उनके किये गये कर्मो के आधार पर फल प्रदान करते है इसलिए शनिदेव कर्मफल दाता है । भगवान सूर्यदेव उनके पिता और छाया माता के वह पुत्र है । भगवान शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास कृष्णपक्ष अमावस्या को हुआ है । पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस बार यह संयोग 16 मई शनिवार भरणी नक्षत्र में शनिश्चरी अमावस्या को रहेगा। पूरे जिलेभर मंदिर देवालय मे श्रद्धा उत्साह के साथ भगवान शनिदेव का जन्मोत्सव मनाया जायेगा। शनिदेव को चढ़ाये सरसो तेल, कालातिल, उड़द - वर्तमान में कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनिदेव की साढ़ेसाती चल रही है। मेष राशि पर प्रथम चरण, मीन राशि पर द्वितीय चरण और कुंभ राशि पर अंतिम चरण का प्रभाव है , जबकि सिंह और धनु राशि पर शनि ढैय्या का प्रभाव है । साढेसाती के दौरान व्यक्ति को आर्थिक मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन सत्कर्म उच्च आचरण, व उपाय से शनिदेव शुभ फल प्रदान करते हैं । साढेसाती वाले जातको को भगवान शनिदेव जन्मोत्सव पर शिवशक्ति, हनुमानजी और शनिदेव की विशेष पूजा अर्चना लाभप्रद है । भगवान शनि मंत्र जाप, हवन पूजन,छायादान करना चाहिये और सरसो तेल, तिलतेल से अभिषेक कर कालीउड़द, काले तिल,काला कपड़ा, इमरती, नीले फूल भेंट करना चाहिये । गरीब जरूरतमंदो को अन्न, वस्त्र, छाता, देना चाहिये। पीपल व शमी वृक्ष के पास दीपक लगाना चाहिये। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार रुद्राभिषेक, हनुमान चालीसा, शनि चालीसा, दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिये। शनि जन्मोत्सव पर शनिश्चरी अमावस्या व वट सावित्री पूजा का विशेष संयोग भी रहेगा । इस दिन महिलायें अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री पूजा करेंगी ।
मंगलवार, 12 मई 2026
सीहोर : भरणी नक्षत्र में मनाया जायेगा न्यायधीश शनिदेव का जन्मोत्सव
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