- नदी बचाओ अभियान से जुड़े सीवन पुत्र पुत्रियां का आयोजन
भाजपा नेता सन्नी सरदार ने सीवन नदी परिक्रमा यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सीवन नदी मात्र एक जलधारा ही नहीं है बल्कि यह सीहोर को सांस्कृतिक पहचान देती है। इस नदी के तट अपने प्राचीन मंदिरों व स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों के कारण ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों और संतों ने तपस्या की है। प्राचीन काल से ही इस नदी के तट लोगों की आस्था के केंद्र रहे हैं। नदी बचाओ अभियान से जड़े सभी सीवन पुत्र पुत्री का अभिनंदन है जिन्होंने इस कठिन समय में भी सीवन नदी के जीवन के लिए समय दान किया है। यात्रा शुभारंभ अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रघुवर दयाल गोहिया ने कहा कि सीवन नदी के तट पर विभिन्न देवी-देवताओं और नंदी महाराज की मूर्तियां व ऐतिहासिक छतरियां स्थित हैं। सीवन नदी के तट का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दुखद अध्याय समेटे हुए है। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सीहोर ब्रिटिश छावनी का एक प्रमुख केंद्र था। 14 जनवरी 1858 को, जनरल ह्यूरोज के आदेश पर 356 भारतीय क्रांतिकारियों को जेल से निकालकर इसी नदी के किनारे सैकड़ाखेड़ी (चांदमारी मैदान) ले जाया गया था। इन सभी देशभक्तों को नदी के तट पर एक साथ खड़ा कर गोलियों से भून दिया गया था। इस शहादत के कारण यह स्थान एक पवित्र स्मारक और तीर्थ के रूप में याद किया जाता है। इसे प्रदूषण से बचाने और एक धरोहर के रूप में संरक्षित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और जनता द्वारा सीवन नदी के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण के विशेष अभियान भी चलाए गए हैं।

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