वाराणसी : नन्हें लेखकों ने गंगा की गूंज को दिया शब्दों का स्वर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 7 मई 2026

वाराणसी : नन्हें लेखकों ने गंगा की गूंज को दिया शब्दों का स्वर

  • सनबीम के 23 विद्यार्थियों की पुस्तक “गंगा - विस्पर्स ऑफ द रिवर” का भव्य विमोचन, काशी की संस्कृति और संवेदना का अनूठा संगम

Student-writer
वाराणसी (सुरेश गांधी). शिक्षा, संस्कृति और सृजनशीलता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब सनबीम शिक्षण समूह के विद्यार्थियों द्वारा लिखित पुस्तक “गंगा - विस्पर्स ऑफ द रिवर” का भव्य विमोचन लहरतारा स्थित परिसर में किया गया। यह अवसर केवल एक पुस्तक के लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि काशी की आत्मा—गंगा—के प्रति नई पीढ़ी की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का सशक्त प्रदर्शन भी बना। सनबीम समूह की इस पांचवीं छात्र-लेखित पुस्तक का विमोचन देश के प्रतिष्ठित विद्वानों और गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में संकटमोचन मंदिर के महंत एवं प्रख्यात पर्यावरणविद प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में 39 जीटीसी वाराणसी के स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर जयदीप चंदा, कैंटोनमेंट बोर्ड के सीईओ सत्यम मोहन, मेजर कंवरदीप सिंह नेगी, शिक्षाविद संदीप सेठी, परनब मुखर्जी, स्कॉलास्टिक इंडिया के नवीन कुमार सिंह, लेखकीय सलाहकार राहुल सैनी सहित सनबीम समूह के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक, उपाध्यक्ष श्रीमती भारती मधोक और निदेशिका श्रीमती अमृता बर्मन मौजूद रहीं। इस पुस्तक को 23 मेधावी छात्र-छात्राओं ने मिलकर लिखा और संकलित किया है, जिसमें गंगा के प्रति उनके व्यक्तिगत अनुभव, विचार और संवेदनाएं समाहित हैं। पुस्तक का संपादन और प्रकाशन स्कॉलास्टिक्स राइटर्स अकादमी द्वारा किया गया है, जबकि कवर डिजाइन छात्र कार्तिकेय कुमार गोंड ने तैयार किया। कार्यक्रम का शुभारंभ तुलसी के पौधे पर गंगाजल अर्पित कर किया गया और छात्र राघवेंद्र ने गंगाष्टकम का सस्वर पाठ कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। बड़ी संख्या में अभिभावक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और काशी के गणमान्य नागरिक इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।


प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि यह पुस्तक केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि गंगा के प्रति जिम्मेदारी का संदेश है। उन्होंने विद्यार्थियों की मेधा और संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। ब्रिगेडियर जयदीप चंदा ने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी यदि बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहकर इतना परिपक्व लेखन कर रहे हैं, तो यह शिक्षा की वास्तविक सफलता है। वहीं सीईओ सत्यम मोहन ने इसे वैश्विक विरासत पर आधारित सारगर्भित प्रयास बताया। सनबीम समूह की निदेशिका अमृता बर्मन ने इसे “आशीर्वाद का क्षण” बताते हुए कहा कि इतने विद्वानों की उपस्थिति विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा सम्मान है। अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक और उपाध्यक्ष भारती मधोक ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को बधाई देते हुए इसे समाज के लिए एक अमूल्य उपहार बताया। यह पुस्तक गंगा के ऐतिहासिक, भौगोलिक, जैविक और आध्यात्मिक पहलुओं को समेटते हुए न केवल उसकी महिमा का गुणगान करती है, बल्कि उसके संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी रेखांकित करती है। सनबीम के इन युवा लेखकों ने केवल एक पुस्तक नहीं लिखी, बल्कि गंगा के प्रति एक संवेदनशील विचारधारा को जन्म दिया है—जो आने वाले समय में समाज को दिशा देने का काम करेगी। 

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