राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अनुसार राजस्व न्यायालयों के सुदृढ़ीकरण और लंबित वादों का निस्तारण सरकार की प्राथमिकता है। अकेले राजस्थान की ही आंकड़ों में बात की जाएं तो इस तरह के 6 लाख 72 हजार वाद रेवेन्यू न्यायालयों में विचाराधीन चल रहे हैं। इनमें से करीब 64 प्रतिशत 4.31 लाख के वाद उपखण्ड अधिकारी के न्यायालयों में निर्णयाधीन है। चिंतनीय यह है कि 6 हजार के करीब वाद तो ऐसे हैं जो 20 से 30 साल के बीच निर्णय के प्रतीक्षा में हैं। राजस्थान के प्रमुख सचिव राजस्व टी. रविकान्त ने इस तरह के प्रकरणों को लेकर गंभीरता दिखाई और रिव्यू के बाद इस तरह की व्यवस्था चाक चौबंद करने के निर्देश जारी कराने की पहल की है कि राजस्व न्यायालयों में विचाराधीन वादों की समयवद्ध नियमित सुनवाई हो, तारीखों पर तारीखें नहीं दी जाएं और प़क्ष प्रतिपक्ष का समुचित अवसर देते हुए वादों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाएं। प्रमुख सचिव राजस्व राजस्थान टी. रविकान्त ने व्यवस्था में सुधार और संवेदनशील प्रशासन का परिचय देते हुए मुख्य सचिव राजस्थान वी. श्रीनिवास ने परिपत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किये हैं। यह कोई राजस्थान की नहीं अपितु इस तरह की पहल की सभी राज्य सरकारों द्वारा किये जाने की आवश्यकता है।
राजस्व न्यायालयों में विचाराधीन वादों के निस्तारण में मुख्यतः तीन कारण सामने आते हैं। इनमें भी सबसे प्रमुख कारण संबंधित पटवारी, गिरदावर, तहसीलदार द्वारा मौका रिपोर्ट सालों तक प्रस्तुत नहीं करना देखा गया है। एक अन्य कारण राजस्व न्यायालयों से जुड़े कार्मिकों को न्यायिक प्रक्रिया के संबंध में प्रशिक्षित किया जाना आवष्यक हो जाता है। आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में भी देरी होती है। इसके अलावा एक अन्य कारण जो कि सर्वविदित है और वह है न्यायालय के नोटिस का तामिल नहीं होना भी है। तामिली के अभाव में समय अधिक लग जाता है। इसके अलावा तारीख पर तारीख और लंबी तारीख देने की परपंरा भी वादों के निस्तारण की बड़ी बाधा है। राजस्थान का संदर्भ इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है कि इन कारणों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किये गये हैं। अब राजस्व पीठासीन अधिकारियों को कार्य दिवस में प्रातः 10 बजे से 2 बजे तक आवश्यक रुप से न्यायालय आयोजित करेंगे। इसमें किसी तरह का अवरोध ना हो इसके लिए यह भी निर्देशित किया गया है कि आवश्यक कार्यों से आयोजित होने वाली वर्चुअल बैठके वीसी आदि 2 बजे बाद ही आयोजित की जाएगी। यह अपने आप में महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल मानी जानी चाहिए। इसके साथ ही मोनेटरिंग व्यवस्था को चाक चौबंद करते हुए संभाग स्तरीय स्थाई एरियर रिव्यू कमेटी का गठन, रिव्यू हेतु 100-100 प्रकरण तय कर विभिन्न स्तर पर निस्तारण प्रगति रिव्यू आदि तय किया गया है। संभागीय आयुक्त से लेकर जिला कलक्टर आदि द्वारा मासिक बैठकों व दौरों के दौरान समीक्षा की व्यवस्था की गई है। पटवारी, गिरदावर या तहसीलदार द्वारा तीन अवसर देने पर भी मौका रिपोर्ट नहीं भेजने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित करने जैसी व्यवस्था की गई है। इसी तरह से तामील व्यवस्था में एक समय बाद समाचार पत्र में प्रकाशन तक का विकल्प दिया गया है। 15 दिन से अधिक की तारीख भी नहीं देने को कहा गया है। निश्चित रुप से यह व्यवस्था इस तरह के वादों के निस्तारण में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सफल हो सकती है।
राजस्थान सरकार की सकारात्मक पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक पहल हो सकती है। इससे जहां लाखों की संख्या में राजस्व न्यायालयों में निर्णय की प्रतीक्षा के वादों के निस्तारण की राह प्रशस्त हो सकेगी वहीं अनावश्यक विवादों का निस्तारण होने से ग्रामीण माहौल में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। अनावश्यक विवाद समाप्त होंगे और एक संवेदनशील प्रशासनीक व्यवस्था का संदेश जाएगा। हो सकता है कि अन्य प्रदेशों द्वारा भी इस दिशा में पहल की जा रही हो तो इस तरह की पहल को अपनाने में किसी तरह का संकोच नहीं किया जाना चाहिए ताकि लाखों की संख्या में इस तरह के विवादों के निस्तारण की पहल सही दिशा में सही कदम हो सके।
डा. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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