उन्होंने कहा, “ (शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र) प्रधान जी और सीबीएसई का कहना है कि ‘कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया’। यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या अनुबंध ईमानदारी से उस सर्वश्रेष्ठ कंपनी को दिया गया था जो काम को सही ढंग से कर सकती थी?” गांधी ने कहा कि 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो केवल तब अर्हता प्राप्त कर सकी जब उसके लिए नियमों में ‘‘ढील दी गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सवाल पूछने के कारण मुझ पर हमला करने वाले भाजपा सरकार के मंत्रियों से- मैंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। इसे (जांच को) सीबीएसई से लेकर सीओईएमपीटी को दिए गए हर अनुबंध तक विस्तारित करें। हमारे युवाओं को सच्चाई जानने का हक है।’’ गांधी ने कहा, “मोदी जी, सीबीएसई की गड़बड़ी पर आपकी चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ आपकी निष्क्रियता देश को बताती है कि आपको वास्तव में किसकी परवाह है - लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सरकार के अस्तित्व की।” कांग्रेस नेता गांधी ने नीट परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ अपनी पहले की बातचीत का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें छात्रों ने पेपर लीक की घटना के बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। राहुल गांधी ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “नीट के छात्रों से मेरी मुलाकात के दौरान एक बात पूरी तरह स्पष्ट हो गई-भारत के युवाओं का नरेन्द्र मोदी पर अब भरोसा नहीं रहा। उन्होंने मुझे बताया कि प्रश्नपत्र खुलेआम व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर बेचे जा रहे थे। उन्हें यह भी पता है कि ये किस कीमत पर बिक रहे थे, कौन इन्हें खरीद रहा था और यह माफिया कैसे काम करता है-इन बच्चों को यह सब जानकारी है।”
उन्होंने कहा कि छात्रों के पास केवल एक ही सवाल था—“अगर हमें यह सब पता है, तो सरकार और संस्थानों को क्यों नहीं? सच्चाई यह है कि ये बच्चे खुद सरकार से बेहतर समझते हैं कि इस “खराब” व्यवस्था को कैसे सुधारा जा सकता है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, “और दूसरी ओर यह कितना शर्मनाक है कि सेना, जिसका काम देश को दुश्मनों से बचाना है, उसे आज मोदी सरकार बच्चों के पेपर को अपनी ही भ्रष्ट व्यवस्था से बचाने के लिए तैनात कर रही है।” गांधी ने अपने पोस्ट में कहा, “अब केवल सतही सुधार से काम नहीं चलेगा। पूरे परीक्षा तंत्र को छात्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर शुरू से फिर से बनाना होगा। हम और बच्चों को नहीं खो सकते। और न ही एक भी पीढ़ी का भविष्य इस भ्रष्ट व्यवस्था के हाथों में छोड़ सकते हैं।” कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि उनसे यह खुलासा हुआ है कि सीबीएसई ने इस साल की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) प्रणाली प्रदान करने वाले ठेकेदारों के लिए प्रस्तावों के वास्ते अपने अनुरोध में तकनीकी शर्तों को लगातार नरम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट रूप से, सीबीएसई की कार्रवाई में अनावश्यक जल्दबाजी तथा गुणवत्ता एवं छात्र-केंद्रित प्रावधानों को कमजोर करने की झलक मिलती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस वर्ष से ही ओएसएम को अपना लिया जाए। रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रायोगिक परियोजना के जरिए गहन जांच किए बिना और तकनीकी बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता से समझौता करके 'ओएसएम' को अपनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाने के पीछे क्या कारण था।

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