- भोर से सुबह नौ बजे तक तीन लाख श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी
- 84 घाटों पर उमड़ा जनसैलाब, 51 बटुकों संग हुआ मां गंगा का दुग्धाभिषेक, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजी काशी
जब गंगा ने छुआ काशी का हृदय, भक्ति में डूब गई बाबा की नगरी
गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य किया और फिर मां अन्नपूर्णा व बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए मंदिरों की ओर बढ़ गए। काशी की गलियों में भी श्रद्धा के कदम थमते नहीं दिखे। मंदिरों के बाहर लंबी कतारें और घंटियों की ध्वनि के बीच पूरा शहर मानो भक्ति के रंग में रंग गया। गंगा दशहरा के इस महापर्व पर घाटों पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन हुआ। पूर्व मंत्री एवं शहर दक्षिणी विधायक नीलकंठ तिवारी ने 51 बटुकों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर विधिवत पूजन किया। 51 बटुकों द्वारा एक साथ किया गया वैदिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। मंत्रों की गूंज, गंगा की कलकल और श्रद्धा की तरंगों ने पूरे घाट क्षेत्र को आध्यात्मिक लोक में परिवर्तित कर दिया।
घाटों पर उमड़ी आस्था की अजस्र धारा
गंगा दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और सनातन संस्कृति के विराट उत्सव के रूप में साकार होता दिखाई दिया। भोर की पहली किरण के साथ ही काशी के घाटों पर श्रद्धा की ऐसी अविरल धारा बही, मानो स्वयं मां गंगा अपने भक्तों को आलिंगन देने धरती पर उतर आई हों। नौतपा की प्रचंड तपिश भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। सुबह चार बजे से नौ बजे तक करीब तीन लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। सूर्योदय से पहले ही दशाश्वमेध, अस्सी, राजेंद्र प्रसाद, शीतला, पंचगंगा और मणिकर्णिका सहित काशी के 84 घाट श्रद्धालुओं की भीड़ से भर उठे। गंगा की लहरों के किनारे दीप, फूल, आरती और मंत्रोच्चार का दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे पूरी काशी आध्यात्मिक चेतना के किसी विराट अनुष्ठान में डूब गई हो। घाटों पर हर-हर महादेव और गंगा मैया के जयघोष की अनुगूंज वातावरण को भक्तिमय बना रही थी।

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