गुरुद्रेव पंडित प्रदीप मिश्रा के निर्देश पर समिति की ओर से इसकी शुरूआत की है और यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को पौधों का वितरण किया है। इस मौके पर पंडित विनय मिश्रा और पंडित समीर शुक्ला ने आस-पास के ग्रामीणों से अधिक से अधिक पौधों का रोपण करने की अपील की है। गंगा दशहरा के पश्चात आगामी दिनों में विश्व पर्यावरण दिवस पर भी पौधा रोपण का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि समिति हर साल पर्यावरण को लेकर पौधारोपण के अलावा निशुल्क पौधों का वितरण करती है। पेड़ों को धरती पर ऑक्सीजन का बेस्ट और इकलौता सोर्स माना जाता है। जिसमें पीपल का पेड़, बरगद का पेड़, नीम का पेड़, अशोक का पेड़, अर्जुन का पेड़, जामुन का पेड़ और तुलसी के पौधे आदि हैं। प्राकृतिक वातावरण हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पेड़ पौधे, बगीचे, पर्वत, नदी, तालाब आदि से हमारा वातावरण स्वच्छ रहता है। इसलिए पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए हमें अपने आसपास साफ-सफाई और छायादार पौधों का अधिक से अधिक रोपण करना होगा। फैक्टरियों और वाहनों से निकलने वाला धुआं वातावरण को सबसे ज्यादा प्रदूषित करता है। यदि पर्यावरण को स्वच्छ रखा जाएगा तो हम भी स्वस्थ रहेंगे।
मंदिर परिसर पूर्व में किया गया था द्वादश ज्योतिर्लिंग गार्डन
वहीं फरवरी में मंदिर परिसर में द्वादश ज्योतिर्लिंग गार्डनÓ में 'ग्रीन शिवरात्रिÓ थीम पर पौधा लगाया है। इस गार्डन में 12 विशेष पौधे लगाए हैं। पर्यावरण-हितैषी आयोजन आध्यात्मिकता को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया है। पौधे 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं। इन पौधों को धाम से उनकी वास्तविक भौगोलिक दूरी के आधार पर 'स्केल डिस्टेंसÓ पद्धति से रोपित किया है। इनमें श्री महाकालेश्वर (127 किमी), श्री ओंकारेश्वर (135 किमी), श्री केदारनाथ (864 किमी) और श्री रामेश्वरम (1557 किमी) जैसे प्रमुख ज्योतिर्लिंगों की दूरियों को दर्शाया है।

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