आवेदक ने उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद की निविदा प्रक्रिया, कागज की गुणवत्ता, पन्नों की संख्या, आकार, खरीद लागत, कुल खर्च, जीएसटी भुगतान जैसी जानकारियां मांगी हैं। जवाब में सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं के बारे में कुछ जानकारियां साझा कीं। उसने बताया कि उत्तर पुस्तिकाएं बनाने में इस्तेमाल होने वाले कागज की मोटाई 60 जीएसएम से 120 जीएसएम के बीच थी, उनमें 8, 20, 32, 40 या 48 पन्ने थे और ये 22 सेंटीमीटर चौड़े एवं 28 सेंटीमीटर लंबे और 37.5 सेंटीमीटर चौड़े एवं 54.5 सेंटीमीटर लंबे आकार में उपलब्ध थीं। बोर्ड ने बताया कि अलग-अलग उत्तर पुस्तिकाओं के वजन से जुड़ा रिकॉर्ड नहीं रखा गया था। हालांकि, आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ई) के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या, खरीद लागत और उन्हें खरीदने में हुए कुल खर्च से जुड़ी जानकारी देने से इनकार कर दिया गया था। निविदा प्रक्रिया, हिस्सा लेने वाली कंपनियों के नाम, बताई गई दरों और खरीददार के चयन से जुड़े सवालों पर सीबीएसई ने कहा था कि यह मामला बोर्ड परीक्षाओं की “गोपनीय” और “संवेदनशील” गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। बोर्ड ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(डी), 8(1)(ई) और 8(1)(जी) के तहत इनकी जानकारी देने से छूट होने का दावा किया था। सीबीएसई ने कहा था कि परीक्षा शुल्क से जुड़े खर्च का डेटा अकादमिक सत्र के बजाय वित्त वर्ष के आधार पर रखा जाता है। उसने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया था। ।। बोर्ड ने आवेदक को बताया था कि प्रायोगिक परीक्षाओं पर आने वाली लागत को खर्च के एक बड़े मद के तहत दर्ज किया जाता है और उसे अलग से नहीं दिखाया जा सकता है। आवेदक ने सीबीएसई के जवाब को सीआईसी के समक्ष चुनौती दी। उसने दलील दी कि व्यापक जनहित और पारदर्शिता के पक्ष में खरीद और खर्च से जुड़ी जानकारी का खुलासा किया जाना चाहिए।
सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने कहा कि अपील का मुख्य मुद्दा “उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य संबंधित स्टेशनरी सामग्री की खरीद के लिए निविदा प्रक्रिया” से जुड़ी जानकारी देने से इनकार किया जाना था, जबकि अपीलकर्ता की दलील है कि व्यापक जनहित में इसका खुलासा किया जाना चाहिए। आयोग ने पाया कि केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने “कोई उचित कारण बताए बिना” छूट वाली धाराओं के तहत कई जानकारियां देने से इनकार कर दिया था। सीआईसी ने कहा, “इसलिए, मांगी गई जानकारी देने से इनकार करने के लिए कोई उचित कारण न बताये जाने के कारण सीपीआईओ के 18 मार्च 2025 के विवादित जवाब को रद्द किया जाता है।” उसने कहा, “आरटीआई अधिनियम-2005 की धारा 10 के तहत जिन जानकारियों को सार्वजनिक करने से छूट मिली है, उन्हें छिपाया जाना चाहिए। अगर मांगी गई जानकारी अधिनियम की धारा 8 (1)(डी) के दायरे में आती है, तो सीपीआईओ धारा 19 (5) के तहत कारण बताते हुए जानकारी देने से इनकार करने के कदम को सही ठहरा सकता है।” धारा 8 (1) (डी) वाणिज्यिक गोपनीयता, व्यापार रहस्य या बौद्धिक संपदा जैसी जानकारी से संबंधित है, जिसका खुलासा किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंचाएगा, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि व्यापक जनहित ऐसी जानकारी के खुलासे को उचित है।

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