- सीएम योगी ने कहा- विज्ञान तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज को मिले, ऑर्गेनिक खेती और अनुसंधान आधारित विकास का किया आह्वान, बुजुर्गों के लिए बन रहे देश के तीसरे नेशनल एजिंग सेंटर का निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं थी। किसान अपनी जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार करता था। भारत आज भी कृषि प्रधान देश है और कृषि तथा एमएसएमई क्षेत्र उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 के बाद "एक जिला-एक उत्पाद" योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को नया बाजार उपलब्ध कराया है। डिजाइन, पैकेजिंग और विपणन की सुविधाओं से उन्हें वैश्विक मंच मिला है। योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में लगभग तीन करोड़ लोग कार्य कर रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा के प्रति भारत की सनातन आस्था रही है और भारतीय संस्कृति में प्रकृति तथा विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने किसानों को रसायनों के अनावश्यक प्रयोग से बचने की सलाह देते हुए ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही अनुसंधान और नवाचार को विकसित भारत की अनिवार्य आवश्यकता बताया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। इस दौरान विज्ञान भारती की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. शेखर पांडेय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
नेशनल एजिंग सेंटर का किया निरीक्षण
अधिवेशन से पहले मुख्यमंत्री ने बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 200 बेड के सात मंजिला अत्याधुनिक नेशनल सेंटर फॉर एजिंग का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य को समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। यह केंद्र देश का तीसरा और उत्तर भारत का प्रमुख जरा चिकित्सा संस्थान होगा। यहां बुजुर्गों के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी ओपीडी, मेमोरी क्लिनिक, गठिया क्लिनिक, आईसीयू, पुनर्वास सेवाएं और आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही जरा चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सकों और नर्सों के प्रशिक्षण तथा अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा।

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