कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी सदस्य जल एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जिले भर में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। साथ ही जिला गंगा समिति (नमामि गंगे), मधुबनी द्वारा आयोजित विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों, स्वच्छता अभियानों एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में भी इनकी सहभागिता सराहनीय रही है। इस अवसर पर जिला परियोजना पदाधिकारी (नमामि गंगे), आनंद अंकित ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक विरासत की प्रतीक है। गंगा आरती हमारी सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लोगों को नदी संरक्षण के प्रति भावनात्मक रूप से जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि मधुबनी जिले से पहली बार चार गंगा मित्रों का इस प्रशिक्षण कार्यशाला के लिए चयन होना अत्यंत हर्ष एवं गौरव की बात है। ये सभी प्रतिभागी लंबे समय से जल एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव और ज्ञान का लाभ जिले में चलाए जा रहे गंगा संरक्षण एवं जनजागरूकता अभियानों को मिलेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी प्रतिभागी जिले में गंगा एवं अन्य जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति लोगों को और अधिक प्रभावी ढंग से जागरूक करेंगे तथा मधुबनी का नाम राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।
मधुबनी (रजनीश के झा), 17 जून। परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश (उत्तराखंड) में दिनांक 18 जून से 21 जून तक आयोजित होने वाले गंगा आरती प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लेने हेतु जिला गंगा समिति (नमामि गंगे), मधुबनी का चार सदस्यीय दल आज रवाना हुआ। दल में गंगा मित्र पवन कुमार सिंह, सुभाष कुमार कामत, सन्नी कुमार एवं ज्योति कुमारी शामिल हैं। सभी प्रतिभागी प्रशिक्षण कार्यशाला में भाग लेकर गंगा आरती के विधि-विधान, उसकी आध्यात्मिक महत्ता एवं सांस्कृतिक परंपराओं का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। उल्लेखनीय है कि मधुबनी जिले से पहली बार चार लोगों का चयन इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यशाला के लिए हुआ है, जो जिले के लिए गर्व का विषय है।

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