वाराणसी : बड़े मंगल पर पांडेपुर के प्राचीन हनुमान मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 9 जून 2026

वाराणसी : बड़े मंगल पर पांडेपुर के प्राचीन हनुमान मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

  • विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद, भक्तिरस में डूबा रहा पूरा क्षेत्र

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वाराणसी (सुरेश गांधी )। ज्येष्ठ मास के पावन बड़े मंगल की श्रृंखला के पांचवें और अंतिम मंगल पर मंगलवार को पांडेपुर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अनुपम संगम देखने को मिला। भोर की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर में भक्तों का आगमन शुरू हो गया, जो देर शाम तक अनवरत जारी रहा। बजरंगबली के जयघोष, घंटों और शंखध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंदिर में सुबह विशेष पूजन-अर्चन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने संकटमोचन हनुमान के चरणों में मत्था टेककर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और मंगलकामना की प्रार्थना की। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंग-बिरंगे पुष्पों और विद्युत झालरों से सुसज्जित मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।


बड़े मंगल के अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सेवा भाव से ओतप्रोत स्वयंसेवक सुबह से ही श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण में जुटे रहे। कतारबद्ध होकर लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन समिति की व्यवस्था की सराहना की। मंदिर परिसर में सामाजिक समरसता और लोकसेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी, जहां हर वर्ग और आयु के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण कर रहे थे।श्रद्धालुओं का मानना है कि बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की आराधना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। पूरे दिन क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और उत्साह का माहौल बना रहा।इस अवसर पर क्षेत्र के पार्षद मदन मोहन दुबे सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं का स्वागत किया तथा भंडारे की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए सेवा कार्यों में भी सहभागिता निभाई। उपस्थित लोगों ने बड़े मंगल की परंपरा को काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसे सामाजिक एकता और लोककल्याण का पर्व कहा।संध्या आरती के साथ दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों का समापन हुआ। आरती के दौरान मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। दीपों की ज्योति और भक्तों की आस्था से आलोकित वातावरण मानो यह संदेश दे रहा था कि सेवा, समर्पण और श्रद्धा ही सनातन संस्कृति की वास्तविक शक्ति हैं।

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