आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट का अंतर
भारत में बहुत से लोग यह मानते हैं कि बाजार में मिलने वाली हर आइसक्रीम वास्तव में आइसक्रीम ही होती है, जबकि ऐसा नहीं है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के अनुसार ‘आइसक्रीम’ और ‘फ्रोजन डेजर्ट’ दो अलग-अलग श्रेणियाँ हैं। वास्तविक आइसक्रीम में दूध की वसा का प्रयोग किया जाता है, जबकि फ्रोजन डेजर्ट में वनस्पति वसा या वनस्पति तेल का उपयोग किया जा सकता है। इसलिए पैकेट पर आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट लिखा होना उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
दिल्ली के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों और पोषण विशेषज्ञों का सामान्य मत है कि आइसक्रीम का सबसे बड़ा स्वास्थ्य जोखिम उसमें मौजूद अतिरिक्त चीनी और संतृप्त वसा है। अत्यधिक चीनी का सेवन मोटापा, टाइप-2 मधुमेह, फैटी लीवर और दंत रोगों का जोखिम बढ़ा सकता है। वहीं संतृप्त वसा का अत्यधिक सेवन हृदय रोगों के जोखिम कारकों को प्रभावित कर सकता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार समस्या आइसक्रीम के कभी-कभार सेवन से नहीं, बल्कि उसके नियमित और अधिक मात्रा में सेवन से उत्पन्न होती है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन मीठे पेय, मिठाइयाँ और आइसक्रीम का सेवन करता है, तो उसके शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने लगती है, जिसका परिणाम मोटापे के रूप में सामने आता है।
आइसक्रीम में आखिर होता क्या है?
एक सामान्य आइसक्रीम में दूध, क्रीम, चीनी, दूध पाउडर, फ्लेवर, स्टेबलाइजर और इमल्सीफायर शामिल होते हैं। प्रीमियम श्रेणी की आइसक्रीम में दूध और क्रीम की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, जबकि कम कीमत वाले उत्पादों में विभिन्न प्रकार के विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है। आइसक्रीम उद्योग में ‘ओवररन’ नामक एक तकनीक भी प्रयोग की जाती है, जिसमें आइसक्रीम में हवा मिलाई जाती है। यही कारण है कि एक लीटर आइसक्रीम का वास्तविक वजन कई बार अपेक्षा से कम होता है। अधिक हवा वाली आइसक्रीम हल्की और सस्ती पड़ती है, जबकि कम हवा वाली प्रीमियम आइसक्रीम अधिक गाढ़ी और समृद्ध स्वाद वाली होती है।
क्या आइसक्रीम के कोई लाभ भी हैं?
हाँ, सीमित मात्रा में खाई जाने वाली वास्तविक डेयरी आइसक्रीम कुछ पोषण भी प्रदान करती है। इसमें कैल्शियम, प्रोटीन और कुछ विटामिन होते हैं, जो दूध से प्राप्त होते हैं। लेकिन यह लाभ इतने अधिक नहीं हैं कि आइसक्रीम को स्वास्थ्यवर्द्धक भोजन माना जाए। यदि कोई व्यक्ति केवल कैल्शियम प्राप्त करना चाहता है तो दूध, दही, छाछ और पनीर कहीं बेहतर विकल्प हैं।
बच्चों और युवाओं के लिए सावधानी
बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को पूरी तरह आइसक्रीम से वंचित करना भी उचित नहीं है, क्योंकि इससे उनके मन में इसके प्रति अनावश्यक आकर्षण पैदा हो सकता है। लेकिन नियमित रूप से बड़ी मात्रा में आइसक्रीम खिलाना भी सही नहीं है। सप्ताह में एक या दो बार सीमित मात्रा में आइसक्रीम पर्याप्त मानी जा सकती है। युवाओं में बढ़ती मोटापे की समस्या को देखते हुए डॉक्टर सलाह देते हैं कि आइसक्रीम को भोजन का विकल्प नहीं, बल्कि कभी-कभार मिलने वाले स्वादिष्ट व्यंजन के रूप में देखा जाना चाहिए।
कौन-सी आइसक्रीम चुनें?
यदि आप बाजार से आइसक्रीम खरीद रहे हैं तो कुछ बातों पर ध्यान दें-
1.पैकेट पर आइसक्रीम लिखा हो, केवल फ्रोजन डेजर्ट नहीं।
2.सामग्री सूची में दूध, क्रीम और मिल्क सॉलिड्स प्रमुख घटक हों।
3.चीनी की मात्रा कम हो तो बेहतर।
4.कृत्रिम रंग और फ्लेवर कम हों।
5.विश्वसनीय और गुणवत्ता नियंत्रण रखने वाले ब्रांड का चयन करें।
भारत में डेयरी आधारित आइसक्रीम उपलब्ध कराने वाले प्रमुख ब्रांडों में अमूल, मदर डेयरी, विरका, हेवमोर, वाडीलाल, क्वालिटी वाल्स जैसे स्थापित नाम शामिल हैं। उपभोक्ताओं को किसी ब्रांड का चुनाव करने से पहले उसके लेबल और सामग्री सूची को अवश्य पढ़ना चाहिए। आइसक्रीम को लेकर सबसे बड़ी भूल यह है कि लोग इसे सामान्य खाद्य पदार्थ की तरह खाने लगते हैं। वास्तव में यह एक मिठाई है, जिसका उद्देश्य स्वाद और आनंद देना है, पोषण की पूर्ति करना नहीं। यदि आप स्वस्थ हैं, नियमित व्यायाम करते हैं और संतुलित भोजन लेते हैं, तो कभी-कभार एक स्कूप आइसक्रीम का आनंद लेने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन यदि आइसक्रीम आपकी दैनिक आदत बन जाए तो यही स्वाद धीरे-धीरे स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। इसलिए याद रखिए-आइसक्रीम दवा नहीं, दावत है। दावत का आनंद कभी-कभार लिया जाता है, रोज नहीं।
डाॅ. चेतन आनंद
(कवि एवं पत्रकार)


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