विचार : भारतीय के लिए मातृभूमि की रक्षा करने वाली स्व अटलजी वाला युग नहीं है - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 13 जून 2026

विचार : भारतीय के लिए मातृभूमि की रक्षा करने वाली स्व अटलजी वाला युग नहीं है

Sanjay-goshwami
मातृभूमि (Motherland) वह देश या स्थान है जहाँ किसी व्यक्ति का जन्म होता है और जिससे उसकी गहरी सांस्कृतिक, भावनात्मक और भाषाई पहचान जुड़ी होती है  इसे मातृभाषा और जन्मभूमि के रूप में भी जाना जाता है, जहाँ भूमि को माँ का दर्जा दिया जाता है इधर पीएम मोदी के कार्यकाल के 12 साल पूरे होने पर बहुत से मंदिरों  में विशेष पूजा अर्चना की गई. और एनडीए के स्वागत समारोह हुआ सभी ने हार्दिक बधाई व शुभकामनायें दि मैं भी उनको उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनायें देता हूँ, लेकिन याद कीजियेगा जब 1998 में एनडीए की अटलजी की अगुवाई में सरकार बनी थी  उस समय यानि अटलजी  की एनडीए की सरकार ने देश के प्रति एक जुटता दिखाई थी या मई 1998 में अमेरिका के दबाब में नहीं आया और 1992 के कारगिल युद्ध में भी अमेरिका से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया उससे कारगिल की चोटियों में छिपे आतंकवादी का जब अमेरिका ने सेटेलाईट तस्वीर ना देने के बाद भी महीनों तक युद्ध लड़ा और जीता लेकिन इस अवधी में अमेरिका ने भारत को झुका ही नहीं दिया बल्कि अपशब्दो का इस्तेमाल करना, नाली के कीड़ा,कार्गो प्लेन में अमृतसर जैसे पवित्र स्थल जहाँ स्वर्ण टेम्पल में रोज सभी धर्मों के लोग गुरू के सामने नतमस्तक होकर आशीर्वाद लेते हैं वहाँ भारतीय जो अपने धंधा के लिए अमेरिका गए थे जो सही तरीका नहीं था लेकिन किसी का मडर  नहीं किया उनके  हाथों  में गुलामी की जंजीरो से वहाँ उतारा बड़े ही शर्म की बात है यह 140 करोड़ लोगों का एक ऐसा भारत है जो लोकतान्त्रिक तरीके से सरकार चुनता है वहाँ शुरुआत में ही अमेरिका ने शर्मसार किया, उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर में पता ही नहीं चला की कौन जीता बीच में अमेरिका के राष्ट्रपति का ट्विट से उसने ही सीजफायर का ऐलान किया जो गलत है क्योंकि उसमें जम्मू काश्मीर का भी जिक्र किया था।


आज 12 परमाणु अस्त्र रेडी तो लॉन्च मोड में देश की रक्षा के लिए तैनात है इसका पूरा श्रेय श्री स्व अटलजी को जाता है क्योंकि उन्होंने जो सोचा की पोखरण परमाणु परीक्षण करना है तो कर दिया  वो देश के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया जय जवान जय किसान के बाद जय विज्ञान और भारत फिर अपने निर्णय लेने में स्वतंत्र था इसलिए कारगिल युद्ध को बीच में नहीं बल्कि अंदर तक घुस कर ख़देड़ दिया इसलिए जब तक आप अपनी सेना को उतार कर वहाँ कार्यवाही नहीं करते तब तक दुश्मन को डरा नहीं सकते हैं इसलिए निश्चित रूप से भारतीय सेना ने अपने पराक्रम का परिचय दिया लेकिन सेना के उपप्रमुख ने  ऐ भी कहा की हम एक फ्रंट पर नहीं 3 फ्रंट यानि पाकिस्तान, चीन और तुर्की के साथ अकेले लड़ रहे थे आखिर रूस का साथ भारत का सैन्य सहयोग क्यो नहीं मिला ऐ आगे गंभीर रूप से सोचना चाहिए अटलजी ने कारगिल युद्ध जीतने के बाद अमेरिका को भी भरी सभा  में खड़ी खोटी सुनाया जो इसप्रकार पाकिस्तान के आतंकी हरकत पर कहा था

"हमें मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो, चिंगारी का खेल बुरा होता है' अपने ही घर में सदा खरा होता है 

अमरीकी शस्त्रों से अपनी आजादी को

दुनिया में कायम रख लोगे, यह मत समझो।

दस बीस अरब डालर लेकर आने वाली बरबादी से

तुम बच लोगे यह मत समझो।

भारत माँ का शीश नहीं झुकेगा.. ऐ कविता अटलजी के मेरी 51 कविताओं में जिक्र है


ये ताकत होनी चाहिए किसी प्रधानमंत्री में जो हमें झुकना नहीं बल्कि भारत माता की जय हो का गुणगान कर सके, सत्ता आती है और जाती है लेकिन लोग उसी को याद करते हैं जो अपनी मात्रभूमि की रक्षा के लिए हॅसते हॅसते बलिदान दे देते हैं इसलिए भारत अंग्रेज से भारत माता को आजादी दिलवाई और अमर हो गए अभी जो अमेरिका ने 3भारतीय की एक तरह से निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दि ऐ गलत किया है क्योंकि वो भी हमारे भाई ही हैं उनके रोते बिलखते परिवार की क्या हालत है देख कर बहुत दर्द हुआ और इसपर दूसरे देश से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है और ऐसे में हमें भी क़ोई उचित निर्णय लेने का अधिकार है और लेना भी चाहिए, पश्चिम एशिया में ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी नाकेबंदी अभियान के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है.ऐ बहुत ही दुःखद और निंदनीय है जिसकी जितनी भी आलोचना करें कम है अटलजी क्या डरे थे अमेरिका से, बिल्कुल नहीं हमें हमेशा अपने देश की रक्षा के लिए क़ोई भी बलिदान देना हो उससे बिलकुल नहीं घबराना चाहिए क्योंकि भारत में एक ऐसा इतिहास रहा है जो अपने मात्रभूमि के लिए  शहीद होना पसंद किए लेकिन बड़ी से बड़ी ताकतों से भी नहीं डरे, मात्रभूमि के प्रति हमें हमेशा अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि देश और देश के नागरिक की सुरक्षा करना हमारा दायित्व है जो हमें भगवान राम ने सिख्यया है  इतना संघर्ष कर ही रावण जैसे शक्तिशाली ताकतों के आगे नहीं झुके बहादुरी से सामना किया और ऐ हमारी   मात्रभूमि पर दुष्टो से मुक़्त करने के लिए किया जिसे लोग सदियों तक पुजेंगे क्योंकि सत्य का रास्ता चुना और सही और गलत का अंतर बताया और गलत लोगों से लड़ने का तरीका बताया  अभी माननीय प्रधानमंत्री मोदीजी विदेशी दौरे पर जा रहें हैं · प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं, जहाँ वे एवियन में G7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।G7,शिखर सम्मेलन 15 जून, 2026 से यहां जी7 देशों का शिखर सम्मेलन हो रहा है और इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों. इसमें अमेरिका,कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान,और ब्रिटेन शामिल है।   


इन सात देशों के नेता तीन दिन तक कई अहम मुद्दों पर बात करेंगे. इसमें भारत शामिल नहीं है भारत को निमंत्रण अथिति के रूप में मिला है और वहाँ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी आएंगे क्या मोदीजी उन्हें इस हमले के लिए कुछ कहंगे,इससे रूस को अच्छा नहीं लगेगा क्योंकि पिछले बार G-7 शिखर सम्मेलन में रूस के खिलाफ यह निर्णय लिया गया कि यूक्रेन युद्ध में रूस की यूक्रेन में युद्ध के कारण ब्रिटेन में उसकी सम्पति जब्त करे और इससे रूस के राष्ट्रपति पुतिन को निश्चित रूप से  अच्छा नहीं लगा होगा, इन सब कारणों से रूस भारत को उतना महत्व नहीं दे रहा है क्योंकि यूक्रेन युद्ध में ना तो रूस के पक्ष में बोला ना ही क़ोई सैन्य मदद दि और भारत के तटस्थ रहने के वजह से रूस ने भी ऑपरेशन सिंदूर में आपकी मदद नहीं की और नतीजा ऐ हुआ कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत को तीन फ्रंट पर लड़ना पड़ा जिसमें पाकिस्तान, के साथ चिन,तुर्की और अजरबैजान था चाहता तो रूस चीन को युद्ध पाकिस्तान में मिल रहे हथियार को रोकने के लिए मना सकता था और भारतीय सेना जीत के करीब पहुँच रही थी और बहुत बड़ी जीत होती , इसमें भारत का जीत जरूर है लेकिन उधर पाकिस्तान भी जीत के दावे करने लगा  क्योंकि  अचानक अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने ट्विटर पर भारत के आंतरिक मामलों पर दखलअंदाजी करते हुए खुद ही सीजफ़ायर का ऐलान कर दिया जिसमें भारत के जम्मू काश्मीर के मामले में कह दिया कि बाद में हम देखेंगे आखिर ट्रम्प कौन होता है भारत के आतंरिक मामलों में दखल देनेवाला, भारत एक स्वतंत्र देश है और 140 करोड़ का देश है जो लोकतान्त्रिक तरीके से सरकार को चुनता है इसलिए भारत के लोगों पर यह हमला बर्दास्त नहीं है. जय हिन्द "!








संजय गोस्वामी

स्तंभकार

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