- टेंडर घोटाला मामले में जन सुराज पार्टी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, न्यायिक निगरानी में जांच की मांग
मनोज भारती ने मांग की कि टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर, गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग, अधिकारियों के परिजनों की विदेश यात्राओं, अवैध संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि इस पूरे मामले के वास्तविक लाभार्थी कौन हैं। किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि जन सुराज का मानना है कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि जनता के पैसे और सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। पार्टी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।
जन सुराज के प्रवक्ता कुमार सौरभ ने कहा कि जिस प्रकार देश में नीट और सीबीएसई की परीक्षाओं में धांधली के मामले सामने आए, उसी प्रकार 16 से 21 अप्रैल के बीच बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित AEDO परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिहार के लगभग 700 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा आयोजित की गई थी। 25 अक्टूबर 2025 को जयपुर स्थित कंपनी साईं एडूकेयर को गुजरात हाईकोर्ट की परीक्षा में कथित गंभीर अनियमितताओं के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया था। एनटीए द्वारा भी इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर किन लोगों ने एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा के बायोमेट्रिक सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंप दी?
कुमार सौरभ ने कहा कि बिहार के युवाओं को यह भरोसा कैसे दिलाया जाए कि बीपीएससी द्वारा भविष्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में कोई अनियमितता नहीं होगी? आज साईं एडूकेयर है, कल कोई दूसरी कंपनी हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा गिरफ्तार किए गए कुछ लोग इसी कंपनी से जुड़े थे और AEDO परीक्षा में शामिल हुए थे। जिस बायोमेट्रिक सिस्टम की जिम्मेदारी इस कंपनी के पास थी, उसी प्रणाली का दुरुपयोग कर कथित रूप से प्रश्नपत्र बाहर भेजे गए और उत्तर-पुस्तिकाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई। बीपीएससी के अध्यक्ष और शिक्षा विभाग के सचिव की जवाबदेही कब तय होगी? परीक्षा से जुड़े टेंडर और व्यवस्थाओं में जिन अधिकारियों की भूमिका रही है, उनकी जिम्मेदारी कब निर्धारित की जाएगी? बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर युवाओं के भविष्य के साथ हो रही कथित धांधली आखिर कब बंद होगी?

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