सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री राजीव रंजन सिंह जी ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने में ‘खेत बचाओ अभियान’ की महत्ता पर बल दिया तथा किसानों से सतत् कृषि के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने पशुपालन एवं मत्स्यपालन आधारित आजीविकाओं में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रमुख रोगों के विरुद्ध समय पर टीकाकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने आनुवंशिक सुधार एवं दुग्ध उत्पादन वृद्धि के लिए सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने लघु एवं सीमांत किसानों की आजीविका उन्नयन तथा टिकाऊ कृषि के लिए संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों की सराहना करते हुए वैज्ञानिकों से इन तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में श्री रामनाथ ठाकुर जी ने किसानों से कृषि नवाचारों एवं उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया ताकि रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम हो तथा दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य, उत्पादकता और लाभप्रदता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने किसानों को कम-से-कम एक छोटे भू-भाग पर प्राकृतिक खेती अपनाकर सतत कृषि की दिशा में कदम बढ़ाने की सलाह दी। डॉ. आर. के. सिंह ने ‘खेत बचाओ अभियान’ की राष्ट्रीय प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक देशभर में लगभग 85,000 अभियानों के माध्यम से 75 लाख से अधिक किसानों एवं अन्य हितधारकों को संतुलित उर्वरक उपयोग संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जा चुका है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने बताया कि संस्थान ने 1 अप्रैल से 30 मई 2026 तक ‘संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान’ का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया। उन्होंने कहा कि संस्थान 1 जून 2026 से ‘खेत बचाओ अभियान’ का संचालन कर रहा है तथा किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, समेकित कृषि प्रणाली, धान की सीधी बुआई तथा सूखा-सहिष्णु धान की किस्मों जैसी संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों के बारे में जागरूक कर रहा है। ये तकनीकें बदलती जलवायु परिस्थितियों में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा किसानों की आय और आजीविका संवर्धन में सहायक हैं। कार्यक्रम के दौरान माननीय मंत्रियों ने संस्थान द्वारा विकसित उच्च उपज एवं शीघ्र परिपक्व होने वाली सेम की नई किस्म ‘स्वर्ण विशिष्ट’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरक, हरित खाद, प्राकृतिक खेती तथा एकीकृत कृषि प्रणाली से संबंधित प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने किसानों एवं आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। सभी सहभागी किसानों को सूखा-सहिष्णु धान किस्मों तथा उन्नत ग्रीष्मकालीन सब्जी फसलों के बीज वितरित किए गए। इससे पूर्व आयोजित तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने किसानों के साथ प्राकृतिक खेती, धान की सीधी बुआई एवं जल संरक्षण तकनीकों, हरित खाद, एकीकृत कृषि प्रणाली तथा संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे विषयों पर संवाद किया। कार्यक्रम का समापन किसानों से उत्पादकता वृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा कृषि आय में सुधार के लिए टिकाऊ, संसाधन-कुशल एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि पद्धतियाँ अपनाने की अपील के साथ हुआ।

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