यह याचिका कई खाड़ी देशों में परीक्षाएं रद्द होने के बाद छात्रों के लिए मूल्यांकन योजना लाये जाने के बावजूद सीबीएसई द्वारा याचिकाकर्ता छात्र के परिणाम घोषित नहीं करने को लेकर दायर की गई। याचिका में कहा गया है कि परिणाम घोषित न होने से उसकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं जोखिम में पड़ गई हैं और वह दाखिले के अवसरों से वंचित हो गया है। याचिका में कहा गया है कि पटेल 2026 में सऊदी अरब के अल जुबैल से भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान विषयों में सीबीएसई की 12वीं कक्षा की अंक सुधार परीक्षा में निजी उम्मीदवार के रूप में शामिल हुआ था। पटेल ने दावा किया कि इस मुद्दे के समाधान के लिए उसने 17 मई, 21 मई और 30 मई को सीबीएसई को जो प्रतिवेदन भेजे थे, उनका कोई जवाब नहीं मिला। ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के कारण बढ़ते तनाव के कारण सीबीएसई ने पश्चिम एशिया के सात देशों (बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी थी।
नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय सऊदी अरब के एक छात्र द्वारा दायर उस याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को 12वीं कक्षा की अंक सुधार परीक्षा का परिणाम घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने छात्र द्वारा दायर याचिका पर सीबीएसई और उसके क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा, ‘‘यह एक बच्चे के करियर का सवाल है, वह अपने सभी दाखिले से वंचित हो जाएगा...।’’ न्यायालय ने सीबीएसई के वकील को इस मामले में निर्देश लेने को कहा। शीर्ष अदालत प्रांशु जिगरकुमार पटेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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