विचार : पढ़ाई हेतु मेहनत और लगन जरुरी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 7 जून 2026

विचार : पढ़ाई हेतु मेहनत और लगन जरुरी

Sanjay-goswami
आज सी बी एस सी के बहुत से छात्रों के फेल होने पर खुद बच्चे पर नहीं सिस्टम  पर दोष देना सही नहीं है क्योंकि मैं खुद ही एक छात्रों से मिला हूँ जो कुछ नम्बर से फेल हुए हैं एक गणित के प्रश्न पत्र पर 80 न का कुल अंक था मैंने पूछा कितना सॉल्व किये वो खुद इसको लेकर कंफ्यूज था बाद में बताया पेपर ठीक नहीं गया है और 20-25 न तक ही बना पाएं हैं और मार्क आया 18 कहाँ गलत है 5-10 परसेंट आगे पीछे होते हैं लेकिन ऐसा नहीं होगा कि आप 80 न का सही बनाए और 10-20 न मिला है तो हमें बताये कहाँ हुआ है क्योंकि मैं भी जानना चाहता हूँ कि सही में हकीकत क्या है आप कल्पना कीजियेगा जब मैं खुद मैट्रिक में गणित में बहुत अच्छा पढ़ने के बाद भी मेरा एग्जाम ठीक ही नहीं टेढ़े सवाल में उलझ गए बाद में समय निकला और अंत में पेपर ख़राब हुआ और जैसा मैंने सोचा था लगभग उतना ही आया पासिंग मार्क से कुछ ही ज्यादा जो सबसे अंतिम सब्जेक्ट हो गया मुझे इस बात का दुःख हुआ कि जिस टीचर ने इतना मेहनत कर पढ़ाया और उसी के सामने मुँह दिखाने के लायक नहीं हूँ लेकिन एक दिन रास्ते में मिले और कहा तुम अच्छे स्टूडेंट हो और ऐ एक बैड लक हुआ लेकिन तुम आगे मैथ में अच्छा करोगे अभी तो पूरा कैरियर बाकि है अतः मैंने इंटर में साइंस में मैथ और सांख्यिकी दोनों लिया और एक से एक पुस्तक खरीदी और जहाँ पेपर का कटा छठा खाली पेपर मिलता था वहाँ से किलो के भाव में ख़रीदा और खुब प्रैक्टिस किया और जो 10 वीं में मैथ में खुब नम्बर लाये थे वो भी इंटर में मैथ लिया कुछ तो उसी लय में अच्छा किया कुछ इस गलतफहमी में रह गए की दसवीं में गणित में 100 में 99-100 मिला है तो इंटर में भी ऐसा ही होगा थोड़ा पढ़ते फिर ख़िताब बन्द कर देते और बाद में बुरे दोस्तों के मण्डली में गए और सिगरेट तम्बाकू और यहाँ तक जवानी के जोश में अवैध तरीके से कोने में घुसकर ब्लू फ़िल्म एक बार क्या देखा उसकी आदत लग गई और जब एग्जाम में बैठा तो पसीने छूटने लगे कभी आगे देखा कभी पीछे उधर इनविजलेटर बार बार चिल्ला रहा था बाद में मजिस्ट्रेट आया और उठा कर लें गया। 


अतः परीक्षा 10 वीं आपको आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है लेकिन इंटर आपका करियर बनाता है वही से शुरुआत होता है आपका भविष्य और एक बात हमेशा ध्यान देने की जरुरत है कि आज के समय में गणित पर पकड़ होना बहुत जरुरी है भले ही आप आर्टस लो क्योंकि आज ए आई और डाटा साइंस फाइनेंस में गणित ही काम आता है और ऐ भी ध्यान देना जरुरी है कि दसवीं का मैथ और इंटर का मैथ बिलकुल अलग है और मैथ ही एक ऐसा विषय है जो क़ोई भी टीचर अन्य विषयों जैसा नहीं पढ़ा सकता है ना ही रट्टा लगाकर पास कर सकते है इसमें मेहनत और संयम और काफी प्रैक्टिस की जरुरत होती है आज तो फिर भी प्रश्न पहले से कठिन नहीं रहते हैं पहले के दौर में इंटर साइंस मैथ में कम लोग पास करते थे उसके प्रश्न आज के प्रश्न से काफी कठिन होते थे नहीं होता है तो गूगल में देखिए 1975 के दौर का गणित और आज का गणित, उसमें ग्रेजुएशन लेवल के मैथ रहते थे आज बहुत से क्वेश्चन ऑब्जेक्टिव आते हैं जिसमें उतना मेहनत नहीं दिमाग़ दौड़ाकर ही हल कर सकते हैं खैर जब मुझे 10 वीं में मैथ में अच्छा स्टूडेंट होने के बाद एग्जाम में पासिंग मार्क के करीब आया तो धक्का लगा और खुब प्रैक्टिस की एक तरीके से नहीं दो तीन तरीके से बनाने की कोशिश की दिनभर यही सोचता आखिर बन क्यों नहीं रहा है फिर लग जाता सॉल्व करने में ऐ 1988 की बात है उस समय स्टेट बोर्ड था और सी बीएस सी भी लेकिन ज्यादा लोग स्टेट बोर्ड से ही करते क्योंकि उसमें फीस कम लगता था और लोग कॉलेज भी जाते थे खैर कॉलेज में भी जाना जरुरी होता है क्योंकि वहाँ जब टीचर क़ोई सवाल पूछता और फट सा उत्तर दे देते तो आपका हौसला बढ़ता था ।


एक बार फिजिक्स के जाने माने टीचर ने एक सवाल पूछा और किसी से नहीं हुआ तो मैंने बना दिए थे तो वो बहुत खुश हुए और कॉफीडेन्स लेवल बढ़ा, और हमने तो एक साल में ही मैथ को  इंटर में ही पूर्ण  किया और फिर भी प्रैक्टिस करता रहा जब एग्जाम हुए तो उस समय का पेपर और आज के पेपर से तुलना कीजियेगा तो मालूम होगा पहले पेपर कठिन था क्योंकि उसमें सारे प्रश्न सब्जेक्टिव रहता और आज की तरह ही दो पेपर होते थे लेकिन पहले टाइम कम होता था सब्जेक्टिव पेपर को सॉल्व करने में, एक पेपर में कुल 8 प्रश्न रहते एक प्रश्न में 3 प्रश्न और रहते थे समय डाई घंटा लेकिन हमने दोनों पेपर में 1-2 प्रश्न आधा छोड़कर सब बना लिया 1तो गलती से छुट गया जो आता था क्योंकि उसे हमने देखा ही नहीं खैर कुल मिलाकर 200 में 152 न मिला आशा थी की शायद 165 से ज्यादा मिलेगा लेकिन फिर भी ठीक रिजल्ट हुआ क्योंकि कुछ मार्क हैंड राइटिंग के साथ भी जुड़े होते हैं और मैथ के पेपर चेक करनेवाला ऐसे हैंडराइटिंग नहीं देखता वो ऊपर और निचे के कुछ स्टेप से पकड़ लेता है कि लड़के ने खुद से बनाया है या नकल किया है लेकिन मैथ एक ऐसा विषय है कि आपने जो प्रोसेस से हल किया हो शायद पेपर चेक करनेवाला उससे संतुष्ट ना हो इसलिए जब आप 100 का टारगेट लेकर चलते हैं तो समझ लें 75-80 के आसपास आप का मार्क आएगा, हमने एक और सब्जेक्ट मैथ के साथ ऑप्शनल में  सांख्यिकी भी लिया उसके प्रश्न तो पहला इतना कठिन था कि कुछ छात्रों ने क्वेश्चन देखकर ही चला गया क्योंकि उसमें फेल होने से भी रिजल्ट पर क़ोई फर्क नहीं पड़ता था लेकिन मैं ही एक अकेला लगा रहा और 65 क्वेश्चन का उत्तर दिया उस पेपर में 55 अंक मिले जब दूसरा पेपर था तो बहुत से लड़के ने तो भाग ही नहीं लिया और छोड़ कर चले गए कुछ ने एग्जाम दिया क्योंकि उसमें ज्यादातर प्रश्न आंकड़ों) के संग्रह, विश्लेषण, व्याख्या, प्रस्तुति और संगठन से संबंधित था फिर भी मैं पुरी कोशिश की और 100 में 37 अंक मिले और सांख्यिकी में दोनों मिलाकर 45 परसेंट से ऊपर ही रहा लेकिन इससे मार्कशीट में एक प्लस पॉइंट ऐ रहा कि उसमें लिखा था  


सांख्यिकी में भी पास है अतः उस दौर और आज के दौर में काफी अंतर है लोग सोचते हैं पैसे के दम पर पास करा लेंगे घर में दिन भर बन्द रखना इससे मानसिक संतुलन ख़राब होता है आज आईपीएल के चक्कर में क्रिकेट में करियर बनाने की होड़ में बच्चों की पढ़ाई गड़बड़ा रहा है कुछ बच्चे को माता पित्ता को खुद से देखना जरुरी है और खेलना, मनोरंजन करना मानसिक संतुलन को बढ़ाता है अच्छा करने के लिए मेहनत करना जरुरी हैं और मेहनत में लगन भी होनी चाहिए कुछ मीडिया की भी गलती है पढ़ाई के बारे में कुछ बताते ही नहीं बस पेपर लीक हो गया छात्रों ने आत्महत्या कर लिया पेपर लिक पहले भी होते थे तभी जब बच्चे आईआईटी में दाखिला तो लें लेते लेकिन ख़राब परफॉरमेंस होने के बाद वहाँ से निकाल दिए जाते थे कई बार आईआईटी, रूडकी और दिल्ली ने निकला है पेपर लीक कर जो छात्रों ने पास भी किया होगा उसे आगे और भी गंभीर समस्या सामने आएगी जब ज्ञान के अभाव में या तो वहाँ बार बार फेल होंगे या कॉलेज से निकाल दिए जायेंगे तो घर आकर उनकी कितनी बेइज्जती होगी इज्जत उसी को मिलेगा जो इसमें लीक होने के बाद भी मेरिट के आधार पर पास हुआ है आज छात्रों को क़ोई चढ़ा रहा है तो मीडिया और कोचिंग सेंटर है क्योंकि मीडिया पढ़ाई का दिखाता नहीं कोचिंग सेंटर इतना फ़ास्ट चलता है कि बच्चे को प्रैक्टिस करने का समय ही नहीं मिलता और पिता सोचता है कि बहुत बढ़िया कोचिंग है बच्चा अभी ही आकाश से तारा तोड़ कर लें आएगा थोड़ा समय दीजिये और सिस्टम से आगे चले बेसिक स्कूल से बजबुत करें और संयम से काम लें,  एक तो मोबाइल की लत फिर सही चीज ना दिखाना कभी भी किसी भी विषय पर क़ोई क्लास नहीं लेना मेरे समय में भले ही ब्लैक एंड वाइट था लेकिन डी डी में पढ़ाई के बारे में जानकारी मिलती थी.








संजय गोस्वामी 

स्तंभकार

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