अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। शहबाज ने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को मध्यस्थ के रूप में स्वयं उन्होंने भी अनुमोदित किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, “इस्लामाबाद एमओयू तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इसके तहत पहले कदम के रूप में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलेगा, जबकि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी तत्काल प्रभाव से हटा लेगा।” होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ऊर्जा क्षेत्र के दृष्टिकोण से यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है और वैश्विक समुद्री व्यापार के सबसे व्यस्त तथा सामरिक रूप से सबसे अहम नौवहन मार्गों में इसकी गिनती होती है।
शहबाज ने ट्रंप को भी बधाई देते हुए उनकी सराहना की और कहा कि कूटनीति के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देने के दृष्टिकोण ने एक बार फिर ऐसे संघर्ष को समाप्त करने में मदद की है, जो क्षेत्र और उससे बाहर के देशों के लिए विनाशकारी परिणाम लेकर आ सकता था। उन्होंने इस उपलब्धि में योगदान के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर सहित अमेरिकी वार्ता दल के प्रयासों की भी प्रशंसा की। शहबाज ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मुजतबा हुसैनी खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के प्रति भी ‘‘सम्मान और आभार’’ व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने शांति का मार्ग अपनाने में बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता और कूटनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया। उन्होंने मोहम्मद बगर गालिबाफ, अब्बास अराघची और एस्कंदर मोमेनी सहित ईरानी वार्ता दल के सदस्यों के प्रयासों की भी सराहना की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस शांति समझौते तक पहुंचने में कतर की भूमिका और उसके रचनात्मक सहयोग को विशेष रूप से रेखांकित किया। इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के नेतृत्व की भी ‘‘अनिवार्य भूमिका और अमूल्य योगदान’’ के लिए प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस समझौते के लिए पाकिस्तान और कतर सहित मध्यस्थ देशों के माध्यम से बातचीत की गई थी। इन प्रयासों के तहत आठ अप्रैल को प्रारंभिक दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसे वार्ता पूरी होने तक बढ़ा दिया गया। शरीफ ने शांति प्रक्रिया में योगदान के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भी सराहना की।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें