पटना (रजनीश के झा) । उच्चतम न्यायालय ने दीपक प्रकाश को बिहार में दोबारा मंत्री नियुक्त करने के फैसले को चुनौती देने के लिए दाखिल याचिका पर सोमवार को बिहार सरकार और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किया। प्रकाश को हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नीत मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया था। हालांकि, वह न तो बिहार विधानसभा और न ही राज्य विधान परिषद के सदस्य हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता से सवाल किया, ‘‘मौजूदा स्थिति क्या है?’’ इसके जवाब में अधिवक्ता ने कहा कि प्रकाश इस समय भी मंत्री हैं। पीठ ने इसके बाद याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए।’’ उच्चतम न्यायालय ने याचिका पर बिहार सरकार, प्रकाश और निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया। पीठ ने मामले की सुनवाई जुलाई में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, जब आंशिक कामकाज के दिनों के बाद शीर्ष न्यायालय सामान्य रूप से काम करना शुरू करेगा। याचिका में दलील दी गई है कि प्रकाश को 20 नवंबर, 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, जबकि वह न तो बिहार विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य थे। इसमें संविधान के अनुच्छेद 164 (4) का हवाला दिया गया है, जो कहता है कि ‘कोई मंत्री, जो निरंतर छह महीने की अवधि तक राज्य विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।’’ याचिका में कहा गया है कि 7 मई, 2026 को प्रकाश को सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया, जबकि वह न तो बिहार विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं।
सोमवार, 15 जून 2026
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पटना : न्यायालय दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को सहमत
पटना : न्यायालय दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को सहमत
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