नई दिल्ली । दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया कंपनियों, सर्च इंजन, वेब होस्टिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया है कि वे ऑनलाइन मंच पर फैलाई जा रही उस "गलत" जानकारी को हटा दें, जिसमें दावा किया गया है कि कई भारतीय न्यायाधीशों और केंद्रीय मंत्रियों ने इस महीने की शुरुआत में लंदन में करदाताओं के पैसे से बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का न्यायमूर्ति तेज करिया की अवकाशकालीन पीठ से शुक्रवार को अनुरोध किया गया। पीठ ने कहा, ‘‘संबंधित विषय-वस्तु साफ तौर पर फर्जी, दुर्भावनापूर्ण और न्यायपालिका, कार्यपालिका और बैडमिंटन खेल का अपमान करने वाली है। ऐसी विषय-वस्तु के लगातार प्रचार-प्रसार से इन संस्थाओं की प्रतिष्ठा पर सीधा असर पड़ता है और अगर इसे तुरंत नहीं रोका गया, तो इससे न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा कम हो सकता है।’’ पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से पता चलता है कि भारत के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की छवि धूमिल करने के मकसद से गलत जानकारी फैलाने का एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा भी लगता है कि गलत और भ्रामक जानकारी फैलाकर केंद्रीय मंत्रियों को भी बेवजह निशाना बनाया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सर्च इंजन, वेब-होस्टिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करके न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।’’ अदालत ने संबंधित अधिकारियों को वस्तुस्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 जुलाई की तारीख तय की है।
रविवार, 21 जून 2026
दिल्ली : न्यायाधीशों की ‘लंदन बैडमिंटन यात्रा’ पर 'झूठी' जानकारी हटाने का निर्देश
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