दिल्ली : टेलीग्राम के 15 करोड़ उपयोकर्ताओं के अधिकारों में कैसे कटौती की जा सकती है : कोर्ट - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 18 जून 2026

दिल्ली : टेलीग्राम के 15 करोड़ उपयोकर्ताओं के अधिकारों में कैसे कटौती की जा सकती है : कोर्ट

Court-on-telegram
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने 21 जून को दोबारा आयोजित की जा रही नीट-यूजी 2026 से पहले टेलीग्राम पर लगाई गई अस्थायी रोक के खिलाफ दाखिल याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए केंद्र के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल इसलिए कि कुछ उपयोकर्ता परीक्षा दे रहे हैं,मैसेजिंग ऐप के 15 करोड़ उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को कैसे सीमित किया जा सकता है? न्यायमूर्ति तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ ने ये टिप्पणियां चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दोबारा आयोजित की जा रही राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट)से पहले ऐप के गलत इस्तेमाल की आशंका के आधार पर लगायी गई अस्थायी रोक के खिलाफ टेलीग्राम की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं।नीट-यूजी 2026 तीन मई को आयोजित की गई थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बीच 12 मई को यह रद्द कर दी गई थी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) प्रश्नपत्र लीक से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। विवादों से घिरी परीक्षा को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए, सरकार ने टेलीग्राम पर 22 जून तक के लिए अस्थायी रोक लगा दी है।  केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए दलील दी कि टेलीग्राम का गलत तत्वों द्वारा दुरुपयोग किए जाने की पूरी आशंका है। टेलीग्राम का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने रखा जबकि केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश की। न्यायमूर्ति करिया ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। इससे पहले केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तकनीकी पहलुओं का संदर्भ देते हुए कहा कि एक टेलीग्राम अकाउंट से 40 तक ‘बॉट्स’ बनाए जा सकते हैं। 


उन्होंने कहा, ‘‘मैं बस एक उदाहरण देता हूं। टेलीग्राम में, एक उपयोगकर्ता 40 बॉट्स बना सकता है। जबकि व्हाट्सऐप के मामले में, प्रत्येक उपयोकर्ता केवल एक ‘बॉट’ के लिए अधिवकृत होता है। टेलीग्राम की संरचना कई बॉट बनाने को बढ़ावा देती है और फिर ये बॉट और भी ज़्यादा संख्या में बन सकते हैं।’’ मेहता ने कहा, ‘‘बॉट्स मशीनें हैं, वे अपनी संख्या और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीग्राम ‘बॉट इंफ्रास्ट्रक्चर’ दे सकता है जो बड़े पैमाने पर जानकारी प्रसारित कर सकता है। यह सुविधा अनोखी है क्योंकि यह कम से कम मानवीय निगरानी के साथ जटिल नेटवर्क बनाने की सुविधा देती है।’’ मेहता ने केंद्र के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सरकार को दूसरे मंचों के साथ यह समस्या नहीं है। मेहता ने बताया कि रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल अक्सर आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है और इसकी संरचना की वजह से अलग-अलग इलाकों में कार्यरत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ‘बॉट्स’ ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम होते हैं जो इंटरनेट पर स्वचालित रूप से काम करते हैं और इंसानों की तरह तेजी से दोहराए जाने वाले कार्य करते हैं। ये अच्छे या बुरे, दोनों तरह के हो सकते हैं और वेबसाइटों पर जानकारी खोजने से लेकर मैसेज भेजने तक के काम करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सबसे तेजी से प्रसारित करने की सुविधा केवल टेलीग्राम पर ही मिलती है। साथ ही, मान लीजिए कि अगर वे एक बॉट को हटा भी देते हैं, तो अलग-अलग नामों और पहचानों से दूसरे बॉट बनाए जा सकते हैं। इसलिए, बॉट के खिलाफ किए गए उपायों से सिर्फ कुछ समय के लिए ही राहत मिलती है।’’ मेहता ने कहा, ‘‘फेसबुक या व्हाट्सऐप जैसे दूसरे मंचों के साथ हमें यह समस्या नहीं होती है। यह मंच ‘क्लाउड’ के ज़रिए काम करता है, इसलिए अगर हम किसी चीज़ को ब्लॉक भी कर दें और कोई गड़बड़ी करे, तो भी कानून प्रवर्तन एजेंसी उस व्यक्ति तक नहीं पहुंच सकती।’’ पीठ ने इस पर सवाल किया, ‘‘हम केवल इसलिए कि नागरिकों का एक समूह परीक्षा दे रहा है, 15 करोड़ लोगों के अधिकारों को कैसे रोक सकते हैं?’’ विधि अधिकारी ने कहा कि इस मंच पर बड़ी संख्या में ग्रुप और चैनल चल रहे हैं और ऐसी सुविधाएं दूसरे मंचों पर देखने को नहीं मिलतीं। पीठ ने फिर सवाल किया, ‘‘प्रश्न यह है कि क्या किसी और के अधिकारों की रक्षा के लिए आप किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों को रोक सकते हैं? इस बारे में अनुराधा भसीन मामले (के फैसले) में कानून की व्याख्या की गई है।’’ विधि अधिकारी ने कहा कि अनुराधा भसीन मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला मंच को बाधित करने से नहीं रोकता। न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रखते हुए पक्षकारों से कहा कि अगर वे कुछ लिखित में जमा करना चाहते हैं, तो बृहस्पतिवार को ही शाम सात बजे तक ऐसा कर सकते हैं। विधि अधिकारी ने जब प्रश्नपत्र लीक और उसमें ऐप की संभावित भूमिका के बारे में बात की, तो न्यायमूर्ति करिया ने टिप्प्णी की, ‘‘हम सभी (प्रश्नपत्र लीक की) स्थिति से वाकिफ हैं। बड़ी संख्या में छात्र इससे प्रभावित हुए हैं। लेकिन रोक लगाने वाले पहलू पर... क्या आप पूरे ऐप को प्रतिबंधित कर सकते हैं? आइए उस पर विचार करें। एक अधिकार है। उस अधिकार का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह किस हद तक किया जा सकता है?’’ पीठ ने कहा,‘‘सवाल यह है कि क्या आप किसी को बचाने के लिए किसी दूसरे के अधिकार को बाधित कर सकते हैं?’’ अदालत ने सवाल किया कि अगर प्रश्नपत्र लीक हो जाता है और प्रसारित हो जाता है, तो आप वास्तविक समय में कैसे निपटेंगे? क्योंकि शिकायत मिलने और कार्रवाई होने तक तो नुकसान हो चुका होता है। पीठ ने पूछा, ‘‘आपके मंच पर किस तरह की वास्तविक समय में निगरानी होती है?’’ इसपर सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि इससे होने वाला नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है और ऐसे निर्देश जारी करने की शक्तियों के तहत ऐप पर रोक लगाई गई है, इसलिए अदालत इस चरण पर दखल नहीं दे सकती। मेहता ने कहा, ‘‘उद्देश्य यह है कि परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाए। और यह उद्देश्य जायज है। मैंने दिखाया है कि हमने कम पाबंदी वाले उपाय अपनाए हैं।’’ अटॉर्नी जनरल ने कहा कि प्रतिबंधात्मक आदेश ‘‘पूर्ण है और इस पर सोच-समझकर निर्णय लिया गया है’’। वेंकटरमणी ने कहा कि यह ऐप अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकता था, इसलिए यह आनुपातिकता का दावा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा,‘‘मैं कहूंगा कि अपने अनोखे ढांचे की वजह से यह मंच स्वघाती है।’’ उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र से टेलीग्राम की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सिफारिश पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत आदेश जारी कर भारत में टेलीग्राम मंच पहुंच को 22 जून तक प्रतिबंधित कर दिया।

कोई टिप्पणी नहीं: