- ग्यारह सूत्रीय मांगों को लेकर आंगनवाड़ी कार्यंकर्तांओं और सहायिकाओं ने कलेक्ट्रेट में किया धरना प्रदर्शन
महिला बाल विकास विभाग में कार्यंरत आंगनबाडी कार्यंकर्ता और सहायिकाओ के द्वारा जायज मांगो को लेकर संघर्ष किया जा रहा है। पिछले 50 वर्षों से शासन की सभी कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने का कार्य आंगनबाडी कार्यंकर्ता और सहायिकाऐं कर रही है। आम नागरिकों के जन्म से लेकर मृत्यु तक की सभी योजनाए विना इनके सहयोग के पूर्ण नहीं होती है। जनगणना, जनसुनवाई, लाडली बहना योजना, मतदाता पुनरिक्षण, बीएलओ, फायलेरिया, मलेरिया, मच्छरदानी वितरण, शौचालय सर्वे, किसी भी एनजीओ का सहयोग करना ग्रामसभा, सभी कल्याणकारी योजना मे कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जाता है। सहयोग न करने पर पद से पृथक करने की धमकी भी दी जाती है। मानदेय में भी काटोत्री की जाती है इस तरह वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान किया जाता है।
महासंघ जिलाध्यक्ष उषा राठौर ने बताया कि न्यूनतम पेंशन कम से कम 5000 रुपये दी दिए जाने। केंद्रीय कर्मचारियों की तरह रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करने, मानदेय में जो पचास प्रतिशत का अंतर है उसको कम करने, आंगनबाडी कार्यंकर्ता और सहायिका की मृत्यु होने पर बहु और बेटी को अनुकम्पा नियुक्ति दी जाने, डय़ूटी पर मृत्यु होने पर सांत्वना राशि कम से कम 5 लाख दिए जाने, आपूर्ति केन्द्रो पर हि कराई जाये और प्रतिमाह कराई जाने। आंगनबाडी कार्यकर्ताओ को आयु सीमा का बंधन हटाते हुए पदोन्नति दी जाने, विभागीय कार्य के अलावा सभी कार्यो से मुक्त रखा जाये। अधिकारी के द्वारा सेवा से पृथक करने की कार्यवाही नहीं की जाने की मांग की गई है। प्रदर्शन में विनोद बोयत, वीर सिंह, विनीत दूबे,राम परमार,,महेश माहेश्वरी,रजनी विश्वकर्मा,दीप माला,गिरजा, माया यादव, मालती यादव, डोली, रुक्मणी, अनुराधा, पद्मा सोनी, अनिता परमार, भगवती, रीना, मीना, नासरिन ख़ान, सरोज, छमा, कलावती सहित बड़ी सख्ंया में आंगनबाडी कार्यंकर्ता और सहायिकाओं शाामिल रही।

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