दिल्ली : मोदी–मैक्रों वार्ता के बाद भारत, फ्रांस ने अगले पांच वर्षों में व्यापार को दोगुना करने का निर्णय लिया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 15 जून 2026

दिल्ली : मोदी–मैक्रों वार्ता के बाद भारत, फ्रांस ने अगले पांच वर्षों में व्यापार को दोगुना करने का निर्णय लिया

Modi-macro-talk-france
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच रविवार को हुई व्यापक वार्ता में 13 मुद्दों पर सहमति बनी, जिनमें नवाचार रूपरेखा, अगले पांच वर्षों में वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य और एक संयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ढांचा शामिल हैं। दोनों पक्षों ने तीव्र गति रेलवे क्षेत्र में सहयोग के लिए एक घोषणा-पत्र और गोपनीय डेटा की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा समझौते को भी अंतिम रूप दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भारत की ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) प्रणाली का विस्तार पेरिस हवाई अड्डे और नीस तक करने पर भी सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत मुख्य रूप से तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित थी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिक प्रगति के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार रात अपने सप्ताहभर के फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे के तहत इस फ्रांसीसी शहर पहुंचे। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि मोदी–मैक्रों की चर्चा में द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे को शामिल किया गया, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु ऊर्जा, व्यापार और निवेश, तकनीक, नवाचार, शिक्षा, गतिशीलता तथा दोनों देशों के लोगों के बीच परस्पर संबंध शामिल हैं। उन्होंने कहा, “चर्चा का प्रमुख केंद्र आर्थिक विकास, तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर भी रहा। यह विशेष रूप से इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इस वर्ष की शुरुआत में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं।”


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत–फ्रांस नवाचार रूपरेखा 2030 का उद्देश्य अत्याधुनिक और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ स्टार्टअप के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करना है, साथ ही शैक्षणिक गतिशीलता और उद्योग–शिक्षा जगत के बीच संबंधों को बढ़ावा देना भी है। दोनों पक्षों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक उच्च-स्तरीय तंत्र के गठन की भी घोषणा की। वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 16 अरब अमेरिकी डॉलर का है। आर्थिक सुरक्षा के लिए एक अलग संवाद तंत्र की भी घोषणा की गई। संयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कार्य समूह का गठन एआई व्यवस्था को बढ़ावा देने तथा संयुक्त अनुसंधान और विकास, क्षमता निर्माण और उद्योगों के बीच आदान-प्रदान को समर्थन देने के उद्देश्य से किया गया है। दोनों पक्षों ने पेरिस हवाई अड्डे और नीस में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के उपयोग का विस्तार करने का भी निर्णय लिया, जिससे यूरोप में भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की पहुंच और मजबूत होगी। इस कदम से भारतीय पर्यटकों, विद्यार्थियों, प्रवासी समुदाय और व्यापार के सिलसिले में यात्रा करने वालों को भी सहायता मिलने की उम्मीद है। मोदी–मैक्रों की बैठक के बाद, दोनों पक्षों ने कानपुर में विमानन और संबद्ध क्षेत्रों में कौशल विकास के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की भी घोषणा की। यह केंद्र विमानन और एयरोस्पेस क्षेत्रों में कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और अनुसंधान को समर्थन देगा। इसके साथ ही यह विनिर्माण तथा एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और संचालन) क्षेत्रों के लिए कार्यबल को मजबूत करने की भी उम्मीद है। इसके अलावा मुख्य रूप से नवाचार और डिजिटल क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं में सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी। मिसरी ने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए एक उच्च-स्तरीय तंत्र की स्थापना, आर्थिक सुरक्षा पर एक संवाद की शुरुआत, नवाचार रूपरेखा 2030 को अपनाना, दोनों देशों के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े संस्थानों के बीच 19 समझौतों पर हस्ताक्षर, तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित एक संयुक्त कार्य समूह के गठन को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया।

कोई टिप्पणी नहीं: