- श्रीरामलीला हमारी सनातन संस्कृति, मर्यादा, धर्म और आदर्शों की जीवंत धरोहर-पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राकेश राय
- रामलीला में मनु-सतरूपा लीला का मंचन, तपस्या कर रहे मनु के पास पहुंचे, भगवान मांगा वरदान
लगातार 12 दिनों तक जारी रहेगी रामलीला
संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि रामायण प्रचारक एवं रामलीला मंडल के तत्वाधान में शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन श्रीनृसिंह लक्ष्मी मंदिर में प्रतिदिन रात्रि आठ बजे से 11 बजे तक जारी रहेगी। इसमें कलाकारों के द्वारा संगीतमय भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया जाएगा। महंत बृजेश शर्मा सहित अन्य ने श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों से रामलीला में शामिल होने की अपील की है।
रामलीला के पहले दिन मनु-शतरूपा की तपस्यासृष्टि के आरंभ
उन्होंने बताया कि पहले दिन रामलीला में भगवान श्रीराम के जन्म के अलावा मनु-शतरूपा की तपस्यासृष्टि के आरंभ में राजा स्वायंभुव मनु और रानी शतरूपा ने सांसारिक मोह-माया त्यागकर एकांत में वन की शरण ली। उन्होंने अपने मन को भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित कर दिया और कठोर तपस्या की। आरंभ में वे केवल फल-फूल खाते थे, फिर केवल जल पीकर, और अंत में बिना कुछ खाए-पिए केवल श्वास के सहारे हजारों वर्षों तक जप करते रहे। भगवान विष्णु का वरदान उनकी इस अनन्य भक्ति और साधना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें मनचाहा वरदान मांगने को कहा। मनु और शतरूपा ने कहा कि वे अपने ही समान एक पुत्र को पाना चाहते हैं। तब नारायण ने मुस्कुराते हुए वरदान दिया कि वे स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे। प्रभु ने कहा कि अगले कल्प में जब आप अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या बनेंगे, तब मैं आपके घर राम के रूप में अवतार लूंगा।
दशरथ-कौशल्या के रूप में जन्म वरदान
दशरथ-कौशल्या के रूप में जन्म वरदान के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने महर्षि श्रृंगी और वशिष्ठ के मा र्गदर्शन में पुत्रकामेष्टि यज्ञ संपन्न किया। यज्ञ की पूर्ण आहुति पर अग्निदेव प्रकट हुए और राजा दशरथ को दिव्य खीर से भरा पात्र दिया। राजा दशरथ ने यह खीर अपनी तीनों रानियों-कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा में वितरित की। प्रभु श्रीराम का अवतार खीर के प्रसाद को ग्रहण करने के दिव्य प्रभाव से माता कौशल्या की कोख से साक्षात् भगवान विष्णु श्रीराम के रूप में अवतरित हुए।

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