बिहार चुनाव में राजनीतिक दलों को 281 करोड़ रुपये चंदा मिला, 193 करोड़ रुपये खर्च किये - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 17 जून 2026

बिहार चुनाव में राजनीतिक दलों को 281 करोड़ रुपये चंदा मिला, 193 करोड़ रुपये खर्च किये

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बिहार में पिछले साल विधानसभा चुनाव में भाग लेने वाली राजनीतिक पार्टियों ने उस दौरान 281.32 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया था और 193.47 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जिसमें प्रचार पर सबसे ज़्यादा खर्च हुआ। ‘ एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। इस रिपोर्ट में पांच राष्ट्रीय पार्टियों --भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)-- तथा पांच क्षेत्रीय पार्टियों --राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल यूनाइटेड (जदयू), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), एआईएमआईएम और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)-- द्वारा दाखिल खर्च के ब्योरों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 पार्टियों ने मिलकर चंदा के तौर पर 281.323 करोड़ रुपये जुटाये, जबकि उनका कुल खर्च 193.466 करोड़ रुपये रहा। इस तरह जमा किए गए फंड और बताए गए खर्च के बीच लगभग 88 करोड़ रुपये का अंतर रहा। प्रचार खर्च का सबसे बड़ा मद बनकर उभरा, और यह राशि कुल खर्च का 36.68 प्रतिशत यानी 100.429 करोड़ रुपये थी। पार्टियों ने यात्रा पर 79.539 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों को एकमुश्त भुगतान के तौर पर 62.072 करोड़ रुपये भी खर्च किए। 


सोशल मीडिया मंच और दूसरे डिजिटल माध्यमों से वर्चुअल प्रचार पर 13.074 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि पार्टियों ने चुनाव आयोग के निर्देशानुसार उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को प्रकाशित करने पर 3.886 करोड़ रुपये खर्च किए। अन्य खर्च 14.804 करोड़ रुपये रहे। एडीआर की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल खर्च का 29.05 प्रतिशत हिस्सा यात्रा पर व्यय किया गया। इस तरह, प्रचार के बाद यह चुनावी खर्च का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा बन गया। बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 161 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया, जिनमें छह राष्ट्रीय दल, 10 क्षेत्रीय दल और 145 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल शामिल थे। हालांकि, यह विश्लेषण केवल उन 10 प्रमुख दलों तक ही सीमित था, जिनके खर्च का ब्योरा उपलब्ध था। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन पार्टियों का विश्लेषण किया गया, उनमें बसपा एकमात्र ऐसी पार्टी थी, जिसने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अपने केंद्रीय मुख्यालय या राज्य-इकाई स्तर पर इकट्ठा किए गए किसी भी फंड की जानकारी नहीं दी।

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