अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व वाले एक बहु-विषयक विशेष जांच दल (एसआईटी) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मामलों और प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं व अन्य कथित अवैधताओं की जांच करनी चाहिए। याचिका में केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट से ऐसे नियामकीय, पर्यवेक्षी और लेखा-जोखा तंत्र बनाने और उन्हें लागू करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया, जो जनहित की रक्षा करने और लाखों भक्तों व दानदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए ज़रूरी हों। याचिका में कहा गया, ‘‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े धन के कथित गबन और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन खबरों ने उन पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, जिन्होंने अयोध्या की गौरवपूर्ण विरासत की पुनर्स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया है।’’ विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अपना हमला और तेज कर दिया है। भाजपा राम मंदिर के निर्माण को अपनी बड़ी उपलब्धियों में से एक बताती रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने “सच्चे सनातनियों” से अपील की है कि वे भाजपा को वोट न दें और न ही पार्टी से चुनाव का टिकट मांगें। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी ने “भगवान राम के साथ धोखा किया है”। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए, राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने लोगों से भाजपा को हराने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल ने देश को “लूटा” है और भगवान राम को भी नहीं बख्शा। भाजपा ने कहा कि राममंदिर के चंदे की कथित चोरी के मामले के आरोपी ना केवल कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, बल्कि उनका सामाजिक बहिष्कार भी हो रहा है, जो हिंदू समाज की भावनाओं को दर्शाता है।
भाजपा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी और जल्द न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ेगा। भाजपा और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाजी बढ़ने के साथ ही, कांग्रेस ने कहा है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में पार्टी का एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को अयोध्या का दौरा करेगा। विपक्षी दल ने दावा किया कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने तीन महीने पहले अयोध्या में चंदा गणना केंद्र पर तैनात अधिकारियों को हटाने की सिफारिश की थी। पार्टी ने जानना चाहा कि मामला सामने आने के बाद उन्हें “कौन” बचा रहा है। रायपुर में संवाददाताओं से बात करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया और कहा, “अयोध्या की लूट तो सिर्फ एक झांकी है, काशी और मथुरा अभी बाकी हैं।” विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि “भगवान राम के अस्तित्व को नहीं मानने वाले और आज तक राम के दर्शन के लिए नहीं जाने वाले लोग उन व्यक्तियों पर आरोप लगा रहे हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज और देश के लिए समर्पित कर दिया है।” इस बीच, फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद ने कहा कि बार एसोसिएशन सीबीआई जांच के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख करेगी और अगर वहां से कोई राहत नहीं मिली, तो वे उच्चतम न्यायालय जाएंगे। उन्होंने कहा कि चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 156(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का भी अनुरोध किया जाएगा। यह धारा मजिस्ट्रेट को यह अधिकार देती है कि अगर पुलिस ने किसी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की है, तो वह पुलिस को संज्ञेय अपराध की जांच करने का आदेश दे सकते हैं। मिश्रा ने कहा, “हम सबसे पहले मामला दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क करेंगे और अगर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो हम अदालतों के ज़रिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे।” हालांकि, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय के भाई ने उनका बचाव किया। बिजनौर जिले के नगीना के निवासी और चंपत राय के भाई सुनील बंसल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उनके भाई ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), राम मंदिर आंदोलन और राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।

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