बीजिंग में संस्कृत सुलेख और सिद्धम लिपि पर एक प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें भारत और चीन की साझा सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत को प्रदर्शित किया गया। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यहां स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि ‘प्रांगण में संस्कृत सुलेख’ शीर्षक से आयोजित इस प्रदर्शनी में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े संस्कृत प्रेमियों की कृतियां प्रदर्शित की गईं। इसका आयोजन बीजिंग स्थित कोर्टयार्ड इंस्टीट्यूट ने किया। दूतावास के अनुसार, यह प्रदर्शनी संस्कृत और सिद्धम लिपि की सुंदरता का उत्सव है, जो भारत और चीन के बीच सदियों से चले आ रहे सांस्कृतिक और बौद्धिक आदान-प्रदान को प्रतिबिंबित करती है। सिद्धम लिपि का उपयोग भारतीय बौद्धों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता था और आज भी कुछ पूर्वी एशियाई देशों में मंत्रों तथा धार्मिक ग्रंथों के लेखन में इसका उपयोग किया जाता है। भारत की उप-मिशन प्रमुख एंजेलीना प्रेमलता ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। चीन में हाल के वर्षों में संस्कृत के अध्ययन में एक नया उत्साह देखा जा रहा है। यह प्राचीन भारतीय भाषा बौद्ध धर्म के साथ 2,000 से अधिक वर्ष पहले चीन पहुंची थी और इसने सदियों से चीनी शासकों और विद्वानों पर गहरा प्रभाव छोड़ा है।
मंगलवार, 30 जून 2026
बीजिंग में संस्कृत और सिद्धम लिपि पर प्रदर्शनी आयोजित
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