- विजेता 10 विद्यार्थी पुरस्कृत किये गये, कवियों ने कवि सम्मेलन में सुनाई विविध रंग की मनमोहक कविताएं
विद्यालय के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने कहा कि महाकवि कुँअर बेचैन जैसे साहित्य मनीषियों की रचनाएँ नई पीढ़ी को संवेदनशील, संस्कारित और सृजनशील बनाती हैं। विद्यालय के सचिव विनय त्यागी ने कहा कि शिक्षा तभी पूर्ण होती है, जब उसमें साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का समावेश हो। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. आराधना बाजपेई ने प्रकृति की मनोहारी छटा का चित्रण करते हुए अपना मुक्तक सुनाया-‘धरती से प्रेम निभाने फिर बादल बनकर आए हैं, सावन-भादों की बूँदों से जीवन-दीप जलाए हैं। मोर नाचा, चातक बोला, हरियाली ने गान सुनाया, भीनी-भीनी माटी की खुशबू ने प्रेम-पुष्प खिलाए हैं।’ वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि डॉ. अनिल बाजपेई ने प्रकृति और मानव के आत्मीय संबंधों को स्वर देते हुए कहा-‘धरती ने बांहें खोल प्रेम से बादल को बुलाया है, सावन-भादों ने अमृत बन जीवन-रस बरसाया है। मोर के नर्तन, चातक की प्यास, हरियाली की मुस्कानों ने, प्रकृति ने अपने प्रेम का अनुपम ग्रंथ रचाया है।’ प्रख्यात कवि, पत्रकार एवं देवप्रभा प्रकाशन के प्रकाशक डॉ. चेतन आनंद ने अपनी ग़ज़ल के इन अशआर से श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की-‘तेरे ख़त जो पुराने मिले, खुशबुओं के ख़ज़ाने मिले। तेरे जैसा मिला ही नहीं, यूँ तो कितने दिवाने मिले।’ गीतकार महावीर वर्मा ‘मधुर’ ने प्रकृति के सौंदर्य का सजीव चित्र प्रस्तुत करते हुए कहा-‘हल्की-हल्की सी बूंदों से, कलियों पे निखार आ गया, किसने इन गुलों में रंग भरे, ये कौन चित्रकार आ गया।’ कवि एम. एल. तेजियान ने श्रमिक जीवन और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए अपनी रचना सुनाई-‘चलता रहा जो पाँव नंगे चिलचिलाती धूप में, तोड़ता रहा वो पत्थर रोज मशीनी रूप में। बच्चे जब अभिभावक बने तो बरबस ही कह उठे, एक मसीहा मिल गया हमको पिता के रूप में।’ कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन राजीव द्विवेदी ने किया। अंत में स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ आराधना बाजपेई ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।

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