सीहोर : रामलीला में राम वनवास का मार्मिक मंचन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

सीहोर : रामलीला में राम वनवास का मार्मिक मंचन

  • राजा दशरथ राम के राज्याभिषेक की तैयारी, कैकई के वर से मिला भगवान को वनवास

Ramleela-sehore
सीहोर। प्रयागराज से शहर के प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में श्री रामायण रामलीला मंडल के तत्वाधान में रामलीला का भव्य आयोजन किया। इस वर्ष राम वनवास का प्रसंग विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। यहां पर मौजूद रामलीला के कलाकारों ने भगवान के स्वयंवर के पश्चात भगवान के वनवास का मार्मिक मंचन किया। मंचन की शुरुआत मंथरा-कैकई और दशरथ-कैकई के संवादों से हुई। जनकपुरी से विवाह के बाद राम-सीता की अयोध्या वापसी होती है। राजा दशरथ राम के राज्याभिषेक की तैयारी कर रहे हैं। मंथरा कैकई को भड़काती है। कैकई दशरथ से दो वरदान मांगती हैं, भरत को राजगद्दी और राम को चौदह वर्ष का वनवास। रामलीला के महंत बृजेश शर्मा, संत माधवदास महाराज, संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, सनातन सेना प्रदेश सचिव पवन केवट, आयुष गुप्ता आदि ने आरती कर शुरूआत की। राजा दशरथ कैकई की मांग स्वीकार करते हैं। राम माता कौशल्या से विदाई लेते हैं। उनके भावुक संवाद से दर्शकों की आंखें नम हो गईं। राम, सीता और लक्ष्मण वन की ओर प्रस्थान करते हैं। पुत्र वियोग में राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय ने पौराणिक प्रसंग को जीवंत कर दिया।


सीता स्वयंवर के बाद जब श्री राम-लक्ष्मण अयोध्या

संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सीता स्वयंवर के बाद जब श्री राम-लक्ष्मण अयोध्या पहुंचते हैं, तो पूरे राज्य में खुशियां मनाई जाती हैं। राजा दशरथ श्री राम को अयोध्या का राजकाज देने का निर्णय करते हैं। अंतिम समय पर कैकेयी अपनी दासी मंथरा के कहने पर पूर्व में दिए गए राजा दशरथ को दो वर मांग लेती है। पहले में वह श्री राम को 14 वर्ष का वनवास, दूसरे में भरत को अयोध्या का बनाने को कहती हैं। राजा दशरथ कैकेयी को बहुत मनाते हैं, मगर कैकेयी नहीं मानतीं। जब श्रीराम को पता चलता है कि माता कैकेई ने भरत के लिए राज्य अभिषेक और उनके लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा है तो वह सहर्ष तैयार हो जाते हैं। इसके बाद तीनों सन्यासी की वेशभूषा में राजा दशरथ एवं तीनों रानियों से आज्ञा लेकर वन के लिए प्रस्थान करते हैं।

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