सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज कर सरकार लोकतांत्रिक आवाज को दबाना चाहती है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर पटना के राजभवन तक छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलनों पर दमन लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। वक्ताओं ने कहा कि बिहार और देश का छात्र-युवा अब दमन से डरने वाला नहीं है। छात्रों पर लाठी चलाकर, आंसू गैस छोड़कर और पानी की बौछारों से आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। छात्र-युवा अपने अधिकार, रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और बेहतर शिक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
मार्च के दौरान प्रमुख रूप से निम्न मांगें उठाई गईं—
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस्तीफा दो!
NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करो!
NTA को भंग करो और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाओ!
छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलनों पर लाठीचार्ज बंद करो!
महिला प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित करो!
दिल्ली और पटना में छात्रों पर हुए दमन की जांच कर दोषी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करो!
नेताओं ने कहा कि छात्र-युवा की आवाज को लाठी के बल पर दबाने की कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिरोध किया जाएगा। छात्र-युवा एकता और संघर्ष के बल पर सरकार को जवाब देने के लिए तैयार हैं।

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