कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने बिहार की परिस्थितियों के अनुरूप मेजर कार्प प्रजातियों के वैज्ञानिक मत्स्य पालन, आधुनिक तालाब प्रबंधन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, मत्स्य रोगों की पहचान एवं उनके वैज्ञानिक नियंत्रण, संतुलित आहार प्रबंधन तथा अधिक उत्पादन प्राप्त करने की उन्नत तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। साथ ही किसानों को सरकारी अनुदान योजनाओं, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) तथा प्रभावी विपणन व्यवस्था के माध्यम से मत्स्य व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने के उपायों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को स्प्रे मशीन एवं वाटर पंप वितरित किए गए।
गोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में डॉ. कमल शर्मा, डॉ. उज्ज्वल कुमार, डॉ. देवकरण, डॉ. विवेकानंद भारती, डॉ. तारकेश्वर कुमार तथा सुश्री वेशवामनी (मत्स्य प्रसार पदाधिकारी) ने व्याख्यान प्रस्तुत किए। उन्होंने प्रतिभागी मत्स्य पालकों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए वैज्ञानिक मत्स्य पालन की नवीनतम तकनीकों एवं व्यावहारिक उपायों की विस्तृत जानकारी साझा की। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों एवं आधुनिक मत्स्य प्रबंधन को अपनाकर मत्स्य पालक उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं। उन्होंने किसानों से गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित आहार, जल गुणवत्ता प्रबंधन तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय बनाने का आह्वान किया। डॉ. रामकेवल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ |

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