वाराणसी : न्यूजीलैंड की ऊन महंगी, भारतीय कालीन उद्योग ने मांगा समाधान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 15 जुलाई 2026

वाराणसी : न्यूजीलैंड की ऊन महंगी, भारतीय कालीन उद्योग ने मांगा समाधान

  • भारत टेक्स-2026 में भारत-न्यूजीलैंड गोलमेज बैठक, सीईपीसी ने उठाया प्रीमियम ऊन की बढ़ती कीमत और कमी का मुद्दा, स्थिर आपूर्ति और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। भारत के हस्तनिर्मित कालीन उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल मानी जाने वाली न्यूजीलैंड की प्रीमियम ऊन की लगातार बढ़ती कीमत और सीमित उपलब्धता अब निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इस गंभीर मुद्दे को भारत टेक्स-2026 के दूसरे दिन आयोजित भारत-न्यूजीलैंड उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने स्पष्ट किया कि यदि गुणवत्तापूर्ण न्यूजीलैंड ऊन की नियमित और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई तो भारतीय कालीन उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। 14 से 17 जुलाई तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स-2026 के दौरान हुई इस बैठक में दोनों देशों ने व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाई देने और वस्त्र एवं ऊन क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में न्यूजीलैंड प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के ग्रामीण समुदाय एवं कृषि राज्यमंत्री मार्क पैटरसन ने किया। भारतीय पक्ष की ओर से कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश गोम्बर ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उनके साथ परिषद के उपाध्यक्ष असलम महबूब, कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक डॉ. स्मिता नागरकोटी तथा प्रमुख निर्यातक जफर इकबाल अंसारी (ईस्टर्न मिल्स) और कैप्टन विजेंद्र जगलान (हेरिटेज ओवरसीज) मौजूद रहे।


बैठक के दौरान सीईपीसी ने कहा कि न्यूजीलैंड की ऊन की कीमतों में लगातार वृद्धि से भारतीय कालीन निर्माताओं की उत्पादन लागत तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कालीनों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ रहा है। परिषद ने यह भी बताया कि केवल कीमत ही नहीं, बल्कि ऊन की सीमित उपलब्धता भी निर्यातकों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ विदेशी खरीदारों की समयबद्ध मांग पूरी करना भी कठिन हो रहा है। सीईपीसी ने जोर देकर कहा कि यदि प्रीमियम गुणवत्ता वाली न्यूजीलैंड ऊन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तो भारतीय निर्माता अधिक मूल्य वाले उत्कृष्ट कालीन तैयार कर सकेंगे। इससे उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी, निर्यात में वृद्धि होगी और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा व्यापारिक व्यवस्था का अधिक प्रभावी उपयोग करने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने तथा वस्त्र और ऊन क्षेत्र में नए सहयोगी अवसर तलाशने पर भी विस्तार से चर्चा की।


सीईपीसी के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश गोम्बर ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में अपार संभावनाएं हैं। यदि कच्चे माल की कीमतों और गुणवत्तापूर्ण ऊन की नियमित आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जाता है तो भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि परिषद भविष्य में भी न्यूजीलैंड के साथ निकट सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है। परिषद के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बदलती परिस्थितियों के बीच विदेशी साझेदारों के साथ लगातार संवाद बेहद आवश्यक है। न्यूजीलैंड की ऊन अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसकी बेहतर उपलब्धता से मूल्य संवर्धित उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में नए अवसर प्राप्त होंगे। प्रमुख निर्यातक जफर इकबाल अंसारी ने कहा कि ऊन की बढ़ती कीमतों से अधिक चिंता उसकी उपलब्धता को लेकर है। निर्यात बाजार की मांग पूरी करने और उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने के लिए गुणवत्तापूर्ण ऊन की नियमित आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। बैठक का समापन भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्त्र एवं कालीन क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने, सतत विकास को बढ़ावा देने तथा उद्योगों के बीच निरंतर संवाद जारी रखने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। सीईपीसी ने दोहराया कि वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग, व्यापार संवर्धन और वैश्विक भागीदारी के माध्यम से भारत के हस्तनिर्मित कालीन उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत रहेगा।

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