- 29 जुलाई से 29 अगस्त तक सुगम दर्शन, मंगला आरती समेत सभी ऑनलाइन टिकट रहेंगे बंद
- एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्वागत को अंतिम चरण में तैयारियां
- पहले ही दिन 8,688 काशीवासियों ने उठाया नई व्यवस्था का लाभ
अब पूरे दिन खुला रहेगा 'काशी द्वार'
वर्ष 2024 में मंदिर न्यास ने द्वार संख्या-4बी को 'काशी द्वार' के रूप में चिन्हित किया था। उस समय केवल सुबह 4 से 5 बजे और शाम 4 से 5 बजे तक ही स्थानीय लोगों को इस द्वार से प्रवेश मिलता था। अब इस व्यवस्था का विस्तार करते हुए प्रवेश का समय बढ़ाकर सुबह 4:15 बजे से रात 10:45 बजे तक कर दिया गया है। यानी मंदिर खुलने के 15 मिनट बाद से लेकर बंद होने के 15 मिनट पहले तक काशीवासी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि यह सुविधा महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, देव दीपावली, श्रावण मास, प्रमुख सोमवारों और अन्य विशेष पर्वों पर लागू नहीं होगी। उन दिनों सभी श्रद्धालुओं के लिए एक समान दर्शन व्यवस्था लागू रहेगी।
पहले ही दिन उमड़ी काशीवासियों की भीड़
नई व्यवस्था के पहले दिन ही इसका उत्साहजनक असर देखने को मिला। 8 जुलाई को 8,688 स्थानीय श्रद्धालुओं ने 'काशी द्वार' से बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। वहीं 9 जुलाई को दोपहर 1:30 बजे तक ही 5,196 श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ उठा चुके थे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी।
ये दस्तावेज होंगे मान्य
काशी द्वार से प्रवेश के लिए केवल वही व्यक्ति पात्र होंगे जिनके पास— सरकार द्वारा जारी ऐसा पहचान पत्र, जिसमें वाराणसी का पता दर्ज हो। अथवा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन द्वारा जारी वार्षिक दर्शनार्थी पासबुक। इन दोनों में से किसी एक दस्तावेज के आधार पर स्थानीय श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा।
सावन में सबके लिए एक ही व्यवस्था
मंदिर प्रशासन ने साफ कर दिया है कि 29 जुलाई से 29 अगस्त तक चलने वाले श्रावण मास में अलग प्रवेश व्यवस्था लागू नहीं रहेगी। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु दर्शन को देखते हुए सभी को सामान्य कतार से ही प्रवेश मिलेगा। यही नहीं, इस अवधि में सुगम दर्शन, मंगला आरती, सप्तऋषि आरती और अन्य सभी ऑनलाइन टिकटों की बुकिंग भी अस्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। मंदिर की वेबसाइट पर भी इसकी सूचना जारी कर दी गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि टिकट उपलब्धता की जानकारी समय-समय पर पोर्टल पर देखते रहें, क्योंकि भीड़ और प्रशासनिक परिस्थितियों के अनुसार बुकिंग दोबारा शुरू की जा सकती है।
एक करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान
इस बार श्रावण मास में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया है। पिछले वर्ष सावन में लगभग 63 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया था। इस बार कांवड़ यात्रा के विस्तार, बेहतर यातायात व्यवस्था और देशभर से बढ़ती आस्था को देखते हुए संख्या में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने दर्शन मार्ग से लेकर सुरक्षा तक सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
जर्मन हैंगर से मिलेगी राहत
श्रद्धालुओं को तेज धूप और बारिश से बचाने के लिए दर्शन मार्ग पर जर्मन हैंगर लगाए जा रहे हैं। कतारों में पेयजल, चिकित्सा सहायता, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बहुस्तरीय बैरिकेडिंग बनाई गई है ताकि किसी भी स्थिति में अव्यवस्था न हो।
6 से 8 कतारों में होगा इंतजार
श्रावण के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन ने इस बार भी बहु-स्तरीय कतार व्यवस्था लागू की है। श्रद्धालुओं को 6 से 8 चरणों वाली कतारों से होकर गुजरना पड़ सकता है। हर चरण पर सुरक्षा जांच, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और स्वयंसेवकों की तैनाती रहेगी ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
एसओपी बनी मिसाल
मंदिर प्रशासन ने श्रावण के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) भी तैयार कर ली है। अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था इतनी व्यवस्थित और प्रभावी है कि देश के कई प्रमुख धार्मिक संस्थानों ने भी इसकी प्रति मांगी है ताकि वहां भी भीड़ प्रबंधन के लिए इसे अपनाया जा सके।
बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी शिव स्वरूप
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने कहा कि श्रावण और विशेष पर्वों पर काशीवासियों को अलग प्रवेश की सुविधा नहीं दी जा सकती। काशी की परंपरा अतिथि देवो भवः की रही है। बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी शिव स्वरूप हैं और उनका सम्मान करना काशी की संस्कृति है। इसलिए विशेष पर्वों के बाद ही काशीवासियों के लिए अलग द्वार की व्यवस्था पुनः लागू रहेगी।
आस्था और व्यवस्था का संतुलित संदेश
मंदिर प्रशासन का यह निर्णय केवल स्थानीय श्रद्धालुओं को सुविधा देने तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा मॉडल भी है, जिसमें सामान्य दिनों में काशीवासियों को प्राथमिकता मिलती है और श्रावण जैसे विश्व के सबसे बड़े शिवोत्सव में समानता, अनुशासन और सामूहिक आस्था को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। एक ओर 'काशी द्वार' काशीवासियों के लिए स्थायी सुविधा का प्रतीक बनेगा, तो दूसरी ओर श्रावण में एक ही कतार से होने वाले दर्शन यह संदेश देंगे कि बाबा विश्वनाथ के दरबार में अंततः सभी श्रद्धालु समान हैं—चाहे वे काशी के हों या देश-विदेश के किसी भी कोने से आए हों।

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