वाराणसी : राखी में फैशन का तड़का, कलाई पर चमकेगा ‘अमेरिकन डायमंड’ वाला प्यार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 22 अगस्त 2026

वाराणसी : राखी में फैशन का तड़का, कलाई पर चमकेगा ‘अमेरिकन डायमंड’ वाला प्यार

  • मोती-कुंदन से लेकर डिजाइनर और कार्टून राखियों तक की नई रेंज, बाजार में खरीदारी को उमड़ीं बहनें, रिश्तों के रंग में रंगी खरीदारी
  • बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर तो युवतियों की पसंद डिजाइनर राखियां

Fashion-rakhi-varanasi
वाराणसी (सुरेश गांधी)। सावन की फुहारों के बीच अब बाजारों में रक्षाबंधन की आहट साफ सुनाई देने लगी है। दुकानों के बाहर सजे रंग-बिरंगे राखियों के स्टॉल, रोशनी में चमकते मोती और स्टोन, डिजाइनर राखियों की कतार और उनके बीच अपनी पसंद की राखी तलाशती महिलाओं की भीड़ ने बाजार को त्योहार के रंग में रंग दिया है। राखी की हर डोरी जैसे कोई कहानी कह रही है—कहीं बचपन की शरारतों की, कहीं भाई की कलाई पर बहन के भरोसे की तो कहीं दूर बैठे भाई तक प्रेम पहुंचाने की। इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहने के कारण पर्व की तारीख को लेकर कुछ भ्रम था, लेकिन उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाया जाएगा।


राखियों की ऐसी दुनिया, हर कलाई के लिए अलग पसंद

बाजार में राखियों की दुनिया इस बार पहले से कहीं ज्यादा रंगीन और विविध नजर आ रही है। पारंपरिक लाल-पीले धागों वाली राखियों से लेकर मोती, कुंदन, स्टोन, अमेरिकन डायमंड और फैंसी डिजाइन वाली राखियां दुकानों की शोभा बढ़ा रही हैं। बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां खास आकर्षण हैं, जबकि युवतियां और महिलाएं स्टाइलिश और डिजाइनर राखियों को प्राथमिकता दे रही हैं। किसी दुकान पर छोटा-सा रुद्राक्ष लगा रक्षासूत्र आकर्षित कर रहा है तो कहीं भगवान गणेश, ओम, श्रीराम और अन्य धार्मिक प्रतीकों वाली राखियां पसंद की जा रही हैं। कुछ राखियां ऐसी हैं जिन्हें देखकर लगता है मानो कलाई पर कोई छोटा-सा आभूषण सजा दिया गया हो। राखी अब केवल धागे का नाम नहीं रही। वह फैशन, आस्था और भावनाओं का सुंदर संगम बन चुकी है।


महिलाओं की पसंद की राखियां, पहले देख रहीं डिजाइन फिर कीमत

बाजार में राखी खरीदने पहुंची महिलाओं में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। कोई भाई की पसंद के रंग को ध्यान में रखकर राखी तलाश रही है तो कोई उसके व्यक्तित्व के मुताबिक डिजाइन चुन रही है। दुकानदारों के सामने महिलाओं की सबसे आम जिज्ञासा यही है—“कुछ नया दिखाइए।” दुकानदार भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए राखियों की पूरी श्रृंखला सजाकर रख रहे हैं। एक तरफ कम कीमत वाली साधारण राखियां हैं तो दूसरी तरफ प्रीमियम लुक वाली कुंदन, मोती और अमेरिकन डायमंड राखियां भी उपलब्ध हैं। अलग-अलग बाजारों की रिपोर्टों में राखियों की कीमत कुछ रुपये से लेकर सैकड़ों रुपये तक बताई गई है। महिलाओं की खरीदारी सिर्फ राखी तक सीमित नहीं है। भाई के लिए उपहार, मिठाई, ड्राईफ्रूट, कपड़े और अन्य सामान भी उनकी सूची में शामिल हैं। यानी राखी का बाजार धीरे-धीरे एक पूरे पारिवारिक खरीदारी उत्सव में बदलता नजर आ रहा है।


बच्चों की कलाई पर कार्टून, युवाओं में डिजाइनर का क्रेज

बच्चों के लिए बाजार में अलग ही दुनिया सजी है। कार्टून कैरेक्टर, रंग-बिरंगे फूल, आकर्षक आकृतियां और चमकदार राखियां बच्चों को खूब लुभा रही हैं। छोटे भाई के लिए राखी खरीदने वाली बहनें अक्सर ऐसी राखी चुन रही हैं जिसे देखकर बच्चे के चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ जाए। वहीं युवाओं की पसंद कुछ अलग है। वे हल्की, स्टाइलिश और कलाई पर ब्रेसलेट जैसी दिखने वाली राखियों को पसंद कर रहे हैं। कुंदन, स्टोन और अमेरिकन डायमंड वाली राखियों की मांग भी बाजार में दिखाई दे रही है।


राखी में भी दिख रहा ‘लोकल’ का रंग

इस बार राखी बाजार में स्वदेशी और हस्तनिर्मित राखियों की चर्चा भी खूब है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों और महिला समूहों द्वारा तैयार की गई पर्यावरण अनुकूल राखियां बाजार तक पहुंच रही हैं। प्रयागराज में ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 300 महिलाओं द्वारा एक लाख से अधिक कपास के धागों से पर्यावरण अनुकूल राखियां तैयार किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। इससे त्योहार की खुशी के साथ महिलाओं की आय का नया जरिया भी बन रहा है। यही वजह है कि राखी का त्योहार अब केवल भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों और महिला उद्यमिता के लिए भी अवसर बनता जा रहा है।


तिरंगे से लेकर थीम वाली राखियां भी बाजार में

स्वतंत्रता दिवस के आसपास पड़ने वाले रक्षाबंधन ने इस बार राखियों में भी देशभक्ति का रंग घोल दिया है। तिरंगे रंगों वाली राखियां और राष्ट्रभाव से जुड़ी थीम वाली राखियां बाजार में दिखाई दे रही हैं। कई जगह ऐसी राखियों की मांग बढ़ने की खबरें हैं, जिनमें भाई-बहन के रिश्ते के साथ देशप्रेम की भावना भी जुड़ी हुई है। यानी इस बार भाई की कलाई पर बंधने वाला धागा सिर्फ रिश्ते की रक्षा का संकल्प नहीं, बल्कि भारतीयता और स्वदेशी भावना का संदेश भी देता नजर आ रहा है।


बाजार के लिए भी त्योहार, व्यापारियों को बढ़ी उम्मीद

रक्षाबंधन के साथ बाजार में मिठाई, कपड़े, गिफ्ट आइटम, कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी और पैकेजिंग से जुड़े कारोबार में भी तेजी आने की उम्मीद है। व्यापार जगत में इस वर्ष रक्षाबंधन से जुड़े कारोबार को लेकर बड़े अनुमान सामने आए हैं। लेकिन आंकड़ों से कहीं बड़ी चीज बाजार में दिखाई दे रही है—रिश्तों की खरीदारी। कोई बहन वर्षों बाद घर लौटने वाले भाई के लिए राखी चुन रही है, कोई दूर शहर में रहने वाले भाई को डाक या कूरियर से राखी भेजने की तैयारी कर रही है और कोई भाई अपनी बहन के लिए उपहार तलाश रहा है। दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ के बीच दुकानदारों के चेहरे पर भी मुस्कान है। त्योहार उनके लिए कारोबार लेकर आया है तो खरीदारों के लिए अपनेपन का अवसर।


एक धागा, जिसमें पूरा बचपन बंधा है

रक्षाबंधन की सबसे खूबसूरत बात यही है कि बाजार चाहे जितना बदल जाए, राखी का अर्थ नहीं बदलता। चमकदार डिजाइन बदल सकते हैं, रंग बदल सकते हैं, कीमत बदल सकती है, लेकिन भाई की कलाई पर बंधने वाला धागा आज भी वही संदेश देता है—“तुम मेरे हो और मैं तुम्हारी।” इसीलिए बाजार में राखियां खरीदती महिलाओं के चेहरों पर सिर्फ खरीदारी की व्यस्तता नहीं, बल्कि यादों की चमक भी दिखाई देती है। किसी को मायके की सीढ़ियां याद आ रही हैं, किसी को भाई के साथ बचपन की लड़ाई और फिर उसी भाई से छिपकर मिठाई खाने की शरारत। किसी के लिए राखी का मतलब घर लौटना है तो किसी के लिए दूर बैठे भाई तक प्रेम का एक छोटा-सा पैकेट पहुंचाना। बाजारों में सजी राखियां दरअसल रंगीन धागे नहीं हैं। वे उन रिश्तों की छोटी-छोटी निशानियां हैं, जिनके सहारे परिवार की स्मृतियां पीढ़ियों तक चलती हैं। इसलिए इस बार बाजार में राखी की खरीदारी सिर्फ त्योहार की तैयारी नहीं—रिश्तों को फिर से छू लेने की तैयारी है।

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