पटना : जन सुराज पार्टी में शामिल हुई राष्ट्रीय लोक मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष उर्मिला पटेल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 20 अगस्त 2026

पटना : जन सुराज पार्टी में शामिल हुई राष्ट्रीय लोक मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष उर्मिला पटेल

  • छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर जन सुराज का सरकार पर हमला, मनोज भारती बोले- पीएचडी-रिसर्च स्कॉलर्स के साथ हो रहा अन्याय

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पटना (रजनीश के झा) । जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बिहार के छात्रों-युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर गुरुवार को पार्टी कार्यालय, पाटलिपुत्रा में एक  प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने राज्य सरकार पर छात्रों और युवाओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। इसी दौरान राष्ट्रीय लोक मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष उर्मिला पटेल जन सुराज पार्टी में शामिल हुईं। मनोज भारती ने उन्हें गमछा पहनाकर जन सुराज पार्टी की सदस्यता दिलाई। मनोज भारती ने कहा मुझे विश्वास है कि उर्मिला पटेल जी के इतने लंबे राजनीतिक अनुभव का लाभ जन सुराज पार्टी को मिलेगा। हम उर्मिला जी का पार्टी में तहे दिल से स्वागत करते हैं।


मनोज भारती ने कहा कि पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार ने 4 अगस्त से गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन शुरू किया था। इसमें कई लोग भूख हड़ताल पर थे। जानकारी के मुताबिक, 16 अगस्त को कई लोगों की तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा था। उनकी भूख हड़ताल अभी भी जारी है। पीएचडी होल्डर्स और रिसर्च स्कॉलर्स सरकार का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि सरकार ने वादा किया था कि बिहार के सभी प्रखंडों में एक-एक डिग्री कॉलेज खोला जाएगा। इन डिग्री कॉलेजों में जिन प्रोफेसरों की बहाली की जानी है, उनके चयन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मनोज भारती ने कहा कि नए शिक्षकों के चयन की जो प्रक्रिया बिहार सरकार ने लागू की है, वह यूजीसी के प्रावधानों के विरुद्ध है। अगर किसी डिग्री कॉलेज में किसी शिक्षक या प्रोफेसर की बहाली होनी है, तो उसके मूल्यांकन में पीएचडी के अंकों की वैल्यू 30 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय इसे घटाकर 11 प्रतिशत कर दिया है। अगर कोई व्यक्ति पीएचडी कर रहा है तो उसने कितने रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं, इस आधार पर भी उसका मूल्यांकन होना चाहिए कि वह कितना सक्षम है और एक अच्छा प्रोफेसर बन सकता है या नहीं। लेकिन बिहार सरकार की गाइडलाइन में वह प्रावधान ही हटा दिया गया है। एक प्रोफेसर के लिए रिसर्च पेपर की जो अहमियत होनी चाहिए थी, उसे भी हटा दिया गया है। मनोज भारती ने डोमिसाइल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार सरकार ने डोमिसाइल नीति को बिल्कुल उलट दिया है। भारत के किसी भी राज्य में आप जाइए, वहां ऐसी बहाली में उस राज्य के बाहर के लोगों का प्रतिशत सामान्य तौर पर 20 प्रतिशत रखा जाता है। उससे ज्यादा दूसरे राज्यों के लोगों की बहाली नहीं की जा सकती। लेकिन बिहार सरकार ने डोमिसाइल नीति की पूरी तरह से अवहेलना की है।


वहीं, कुमार सौरभ ने बिहार सरकार के एक नोटिफिकेशन को दिखाते हुए कहा कि आप सभी जानते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत बिहार में या बिहार से बाहर कहीं भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए छात्रों को 4 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण देने का प्रावधान था। इसमें किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए डीआरसीसी के माध्यम से छात्रों को यह सुविधा प्रदान की जाती थी। जन सुराज पिछले चार महीने से लगातार यह सवाल उठाया जा रहा था कि बिहार में या बिहार के बाहर पढ़ने वाले छात्रों की सेमेस्टर फीस क्यों नहीं दी जा रही है। लेकिन सरकार लगातार इनकार करती रही कि पैसे की कोई दिक्कत नहीं है। जन सुराज द्वारा बार-बार इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद बांकीपुर चुनाव से एक महीने पहले एक किस्त भेजी गई। पिछले बुधवार को कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें 950 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई और योजना को पांच साल के लिए विस्तार दिया गया। इसके बाद सरकार ने एक विज्ञापन जारी कर बताया कि जिन छात्रों को चार लाख रुपये तक का ऋण मिलता था, वह अब दो लाख रुपये रह जाएगा। मौके पर मीडिया प्रभारी ओबैदुर रहमान, राकेश पटेल, सुभाष कुशवाहा भी मौजूद थे।

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