- कांवड़ यात्रा में भक्ति बनी ऊर्जा, होठों पर शिव नाम और मन में महादेव की आराधना लेकर तय कर रहे 11 किमी का सफर
भक्ति बनी कांवड़ यात्रियों की ऊर्जा
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के मन में महादेव की भक्ति और होठों पर शिव नाम का जाप ही उनकी ऊर्जा का मुख्य स्रोत बना हुआ है। करीब 11 किलोमीटर का पैदल सफर पूरा करने के बाद श्रद्धालु कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर भगवान भोलेनाथ के पावन शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पित कर रहे हैं। जलाभिषेक के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। अनेक श्रद्धालुओं का कहना है कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है।
सेवा पंडालों में श्रद्धालुओं का स्वागत
कांवड़ यात्रियों की सुविधा के लिए सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक विभिन्न स्थानों पर सेवा कार्य जारी हैं। विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा और पंडित समीर शुक्ला सहित सेवादारों ने श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी वितरण की व्यवस्था की। मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भी पेयजल, चाय-नाश्ता और अन्य सेवा कार्य किए जा रहे हैं।
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान भक्तों के मन में महादेव की भक्ति और होठों पर शिव नाम का जाप ही उनकी सबसे बड़ी ऊर्जा है। श्रद्धालु कठिन यात्रा पूरी करने के बाद जब भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं, तो उनके चेहरे पर थकान के बजाय संतोष और भक्ति का भाव दिखाई देता है। कांवड़ यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण सीवन नदी का तट और कुबेरेश्वरधाम तक का पूरा मार्ग शिवमय बना हुआ है। भगवा वस्त्रों में कांवड़ लेकर चल रहे श्रद्धालुओं और गूंजते हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है। सावन के अंतिम दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना के चलते सेवा समितियों एवं स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।

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