इन शिकायतों को आधार बनाकर क्राइम हिलोरे न्यूज ग्रुप ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर सामने आने के बाद प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद आर्य नगर स्थित नियमों के विरुद्ध संचालित बताए जा रहे ब्लू बेल्स बेड एंड ब्रेकफास्ट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे बंद करा दिया गया। इस कार्रवाई का स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया और उम्मीद जताई कि क्षेत्र में संचालित अन्य अवैध गेस्ट हाउसों के विरुद्ध भी इसी प्रकार की कार्रवाई होगी। हालांकि, इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। पुलिस पर बिल्ड़र के दवाब में आकर पुलिस आरोप लगाया गया है कि नबी करीम थाना पुलिस ने बंद कराए गए प्रतिष्ठान के मालिक के दबाव में आकर खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार के विरुद्ध ही दंड प्रक्रिया संहिता की निरोधात्मक धाराओं 107/150 के तहत कार्रवाई कर दी। इस कार्रवाई के बाद कई पत्रकार संगठनों और स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। विश्व पत्रकार महासंघ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विक्रम गोस्वामी ने कहा कि यदि किसी पत्रकार ने जनहित में अवैध गतिविधियों को उजागर किया और उसके परिणामस्वरूप प्रशासन ने कार्रवाई भी की, तो उसके बाद उसी पत्रकार को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े, यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और इससे जनहित के मुद्दे उठाने वाले पत्रकारों का मनोबल कमजोर होगा।
गोस्वामी ने आरोप लगाया कि यदि बिल्डरों, अवैध कारोबार संचालकों और स्थानीय पुलिस के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत के आरोप सामने आ रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस आयुक्त और गृह विभाग से मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर शक्ति का दुरुपयोग हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि शिकायत करने वालों और खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों के खिलाफ ही कार्रवाई होगी, तो भविष्य में अवैध गतिविधियों के विरुद्ध कोई आवाज उठाने से पहले लोग डरेंगे। उनका मानना है कि पुलिस का दायित्व शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना है, न कि शिकायतकर्ता या पत्रकार को प्रताड़ित करना। फिलहाल इस पूरे मामले ने नबी करीम थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि पत्रकार के विरुद्ध की गई कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच कराई जाए और यदि किसी भी स्तर पर पुलिस अथवा अन्य व्यक्तियों की अनुचित भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और जनता का कानून व्यवस्था पर विश्वास दोनों सुरक्षित रह सकें।

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