- श्रद्धालुओं ने किए बाबा के दर्शन, भंडारे में निशुल्क प्रसादी का वितरण, पंडित प्रदीप मिश्रा बोले-सच्चे भाव से चढ़ाया एक लोटा जल भी महादेव को प्रिय

सीहोर। सावन मास के दौरान चले कांवड़ मेले का विराम होने के बाद भी भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का सिलसिला थमा नहीं है। भादो मास के प्रारंभ होते ही शहर की जीवनदायिनी सीवन नदी के तट से कांवड़ लेकर कुबेरेश्वरधाम पहुंचने वाले शिवभक्तों का क्रम जारी है। शनिवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीवन तट पर पहुंचे और पवित्र जल कांवड़ में भरकर करीब 11 किलोमीटर की यात्रा करते हुए कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। यहां पहुंचकर श्रद्धालुओं ने भगवान कुबेरेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। शनिवार को 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना की। भादो मास में भी धाम पर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है। कांवड़ लेकर पहुंचने वाले भक्तों के साथ बड़ी संख्या में ऐसे श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं, जो बाबा के दरबार में दर्शन कर अपनी मनोकामना और संकल्प के साथ जल अर्पित कर रहे हैं। सावन मास में सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक प्रतिदिन हजारों कांवड़ यात्रियों के पहुंचने का सिलसिला रहा। ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा के बाद मेले का औपचारिक विराम कर दिया गया है, लेकिन धार्मिक परंपरा के अनुसार भादो मास में भी कांवड़ यात्रा जारी है। शनिवार को सीवन घाट से लेकर धाम तक जगह-जगह भगवा वस्त्रों में शिवभक्त नजर आए। कांवड़ यात्रियों के मुख से हर-हर महादेव, बम-बम भोले और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयकारे गूंजते रहे। बारिश और लंबी दूरी की परवाह किए बिना श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ धाम की ओर बढ़ते दिखाई दिए। सीवन का पवित्र जल लेकर कुबेरेश्वरधाम पहुंचना उनके लिए केवल यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और संकल्प का प्रतीक बना हुआ है।
शाम की आरती में पहुंचे पंडित प्रदीप मिश्रा
शनिवार शाम अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा कुबेरेश्वरधाम की आरती में शामिल होने पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने भगवान शिव की सरल भक्ति पर जोर दिया। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि एक लोटा जल भी यदि सच्चे और पवित्र भाव से भगवान शिव को चढ़ाया जाए तो महादेव उसी से प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान शिव को दिखावे से अधिक भक्त के मन का भाव प्रिय है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शांति प्रदान करती है।
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