वाराणसी : अखाड़ों में गूंजा दंगल, मैट पर उतरी काशी की नई पहलवानी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 17 अगस्त 2026

वाराणसी : अखाड़ों में गूंजा दंगल, मैट पर उतरी काशी की नई पहलवानी

  • परंपरा और आधुनिक खेल सुविधाओं के संगम से नई प्रतिभाओं को मिलेगा मंच
  • पहलवानों की उठापटक पर झूमे दर्शक—विजेता पहलवानों को आयुष जायसवाल ने किया पुरस्कृत

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। नाग पंचमी की शाम काशी के अखाड़ों में सिर्फ कुश्ती नहीं हो रही थी, बल्कि परंपरा, रोमांच और पहलवानी के हुनर का ऐसा संगम दिखाई दे रहा था, जिसने दर्शकों को आखिरी मुकाबले तक बांधे रखा। मैट पर पहलवान उतरते तो चारों तरफ से तालियों की गड़गड़ाहट उठती। कोई कसौटा लगाकर प्रतिद्वंद्वी को चित करने की कोशिश करता तो सामने वाला झटके से दांव काटकर बच निकलता। कभी धोबीपाट, कभी कंधा दांव, तो कभी कमर कसकर उठापटक—हर दांव के साथ दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंचता रहा। खास यह है कि जब नाग पंचमी पर काशी के अखाड़ों में जब पहलवानों ने दांव-पेंच आजमाए तो सदियों पुरानी माटी की महक के साथ आधुनिक खेल सुविधाओं का नया अध्याय भी जुड़ गया। शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के पांच प्रमुख अखाड़ों में इस बार पारंपरिक कुश्ती दंगल गद्दे और मैट पर हुआ। कुश्ती की संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और स्थानीय पहलवानों को सुरक्षित व बेहतर अभ्यास सुविधा देने के उद्देश्य से राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने अपनी विधायक निधि से करीब 30 लाख रुपये की लागत से पांच अखाड़ों को कुश्ती गद्दे उपलब्ध कराए।


महावीर मंदिर अर्दली बाजार, फलाहारी बाबा अखाड़ा शिवपुर, स्वास्तिक व्यायामशाला ढेलवरिया, चतुरी पहलवान व्यायामशाला समेत पांच प्रमुख अखाड़ों में नाग पंचमी पर इन्हीं गद्दों पर दंगल का आयोजन हुआ। अखाड़े के किनारे खड़े दर्शक हर जोरदार पकड़ और दांव पर सांस थाम लेते। जैसे ही कोई पहलवान प्रतिद्वंद्वी को उठाकर पटकने की स्थिति में पहुंचता, पूरा माहौल तालियों और शोर से गूंज उठता। कई मुकाबलों में पहलवानों ने पहले पकड़ बनाने, फिर दांव आजमाने और मौका मिलते ही पलटवार करने की रणनीति अपनाई। कुछ मुकाबले तो इतने रोमांचक रहे कि एक पल में बाजी एक पहलवान के पक्ष में दिखती और अगले ही क्षण दूसरा पहलवान पलटवार कर बढ़त बना लेता। मैट पर उतरते ही पहलवानों की आंखों में जीत का जुनून और शरीर में फुर्ती साफ दिखाई देती रही। कुश्ती में ताकत के साथ तकनीक और सही समय पर दांव लगाने का हुनर ही निर्णायक साबित हुआ। यही वजह रही कि दर्शक केवल मुकाबला नहीं देख रहे थे, बल्कि हर दांव-पेंच का आनंद लेते हुए अपने पसंदीदा पहलवान का उत्साह बढ़ाते रहे।


दंगल के दौरान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने अखाड़ों में पहुंचकर पहलवानों को गद्दे सौंपने के साथ दंगल का उत्साह भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि कुश्ती काशी की पुरानी खेल परंपरा और भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। आधुनिक गद्दे और मैट मिलने से पहलवानों को सुरक्षित अभ्यास के साथ अपनी तकनीक निखारने का अवसर मिलेगा। इससे नई पीढ़ी का रुझान भी पारंपरिक कुश्ती की ओर बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं के लिए सुविधाओं का विकास निरंतर जारी रहेगा। काशी के पारंपरिक अखाड़ों को आधुनिक खेल सुविधाओं से जोड़कर स्थानीय पहलवानों को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। यानी अखाड़े की मिट्टी में रची काशी की पहलवानी अब सुरक्षित मैट पर अपने हुनर को तराशते हुए बड़े मंच की ओर कदम बढ़ाएगी। मुकाबलों के बाद विजेता पहलवानों के चेहरों पर जीत की चमक दिखाई दी। आयुष जायसवाल ने विजेता पहलवानों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। पुरस्कार मिलते ही अखाड़े में फिर तालियां गूंजीं और पहलवानों का उत्साह बढ़ा। नाग पंचमी का यह दंगल इस संदेश के साथ विदा हुआ कि काशी की अखाड़ा संस्कृति अब परंपरा की मिट्टी से निकलकर आधुनिक मैट पर भी अपनी पहचान को और मजबूत कर रही है। इस अवसर पर आयुष जायसवाल, प्रदीप सोनकर (अध्यक्ष), अरविंद सिंह, अशोक मौर्य, मनोज सोनकर, तारा प्रसाद सोनकर, संतोष कुमार यादव, संदीप रघुवंशी, दिनेश यादव, मदन पहलवान, बीके त्रिपाठी, सुनील शर्मा, अनिल शाव, मुरली उपाध्यक्ष, अमित कुमार मौर्य आदि उपस्थित रहे। 

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