पटना : ‘हरियाली अमावस्या’ के अवसर पर कृषि अनुसंधान परिसर में पौधरोपण अभियान आयोजित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 13 अगस्त 2026

पटना : ‘हरियाली अमावस्या’ के अवसर पर कृषि अनुसंधान परिसर में पौधरोपण अभियान आयोजित

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पटना (रजनीश के झा) । हरियाली अमावस्या वर्षा ऋतु का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हरियाली, समृद्धि और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर पौधरोपण एवं पर्यावरण संरक्षण को अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी क्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा मुख्यालय, पटना के साथ-साथ कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, रांची; कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर में पौधरोपण अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आयोजित वृहद पौधरोपण अभियान का सीधा प्रसारण भी किया गया, जिसे संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने देखा।


इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों को सतत भविष्य के लिए हरित संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित किया गया। संस्थान के पटना मुख्यालय, केंद्र तथा दोनों कृषि विज्ञान केंद्रों में कुल 64 फलदार एवं बहुउद्देशीय पौधों का रोपण किया गया। इनमें आम, कटहल, गागर नींबू, इमली और जमरूल के पौधे शामिल थे, जिनका चयन उनके पोषण, पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया। यह पहल ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अनुरूप की गई, जिसके अंतर्गत संस्थान के विभिन्न केंद्रों एवं किसानों के खेतों में अब तक 6,000 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। 


संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संबोधन में कहा कि पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण की गतिविधि नहीं है, बल्कि स्वस्थ, सुदृढ़ और सतत भविष्य के निर्माण की दिशा में एक प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी उचित देखभाल भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि फलदार एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल वृक्ष प्रजातियों का रोपण कृषि-जैव विविधता को मजबूत करता है, विविध आहार के माध्यम से पोषण सुरक्षा को बढ़ाता है तथा सतत उत्पादन एवं बाजार योग्य उपज के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करता है। इसके साथ ही, ऐसे वृक्ष कार्बन अवशोषण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, सूक्ष्म जलवायु के नियमन और जल संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं भी प्रदान करते हैं। संस्थान एवं इसके विभिन्न केंद्रों के 110 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लिया।

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