पटना : 'टीबी मुक्त भारत अभियान' में बिहार की ऐतिहासिक उपलब्धि, एक माह में लक्ष्य का 185 प्रतिशत हासिल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 3 अगस्त 2026

पटना : 'टीबी मुक्त भारत अभियान' में बिहार की ऐतिहासिक उपलब्धि, एक माह में लक्ष्य का 185 प्रतिशत हासिल

  • 1.90 करोड़ से अधिक लोगों की हुई टीबी स्क्रीनिंग, जांच, उपचार एवं पोषण सहायता के सभी प्रमुख मानकों पर बेहतर प्रदर्शन

tb-free-bihar
पटना (संवाददाता)। स्वास्थ्य विभाग, बिहार द्वारा संचालित 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत राज्य ने क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 2 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चले विशेष अभियान के दौरान बिहार ने टीबी स्क्रीनिंग के निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक प्रदर्शन करते हुए 1 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 1.90 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर 185 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने कहा कि यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग की जनस्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता, प्रभावी कार्ययोजना तथा आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा पदाधिकारियों एवं आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता का परिणाम है। अभियान के दौरान गांवों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जांच एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं, जिससे अधिक से अधिक संभावित मरीजों तक समय पर पहुंच बनाई जा सकी। अभियान के दौरान 1,90,91,155 लोगों का निक्षय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया गया। इसके साथ ही संवेदनशील एवं उच्च जोखिम वाले वर्गों के 5,91,305 लोगों का एक्स-रे तथा 1,23,348 लोगों की NAAT तकनीक से जांच कर टीबी की शीघ्र एवं सटीक पहचान सुनिश्चित की गई। आधुनिक जांच तकनीकों के उपयोग से रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव हुई, जिससे मरीजों का समय पर उपचार प्रारंभ किया जा सका।


विशेष अभियान के दौरान 15,004 टीबी मरीजों की पहचान एवं पंजीकरण किया गया। इनमें से 11,956 मरीजों को डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के तहत विशेष देखभाल एवं नियमित फॉलो-अप से जोड़ा गया, ताकि उपचार की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके। वहीं संक्रमण की रोकथाम के उद्देश्य से 42,239 घरेलू संपर्कों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) से जोड़ा गया। इससे ऐसे लोगों में टीबी विकसित होने की संभावना को कम करने की दिशा में प्रभावी पहल की गई। विभाग द्वारा उपचार की प्रत्येक अवस्था पर मरीजों की निगरानी एवं परामर्श की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। टीबी मरीजों के उपचार के साथ-साथ उनके पोषण एवं सामाजिक सहयोग पर भी विशेष बल दिया गया है। अभियान के दौरान 17,643 फूड बास्केट वितरित किए गए तथा 65,796 लाभार्थियों को निक्षय पोषण योजना के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई, ताकि मरीज बिना किसी आर्थिक बाधा के अपना उपचार पूरा कर सकें। नियमित दवा के साथ संतुलित पोषण और सामाजिक सहयोग टीबी से पूर्णतः स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी उद्देश्य से अभियान के दौरान समुदाय आधारित सहयोग एवं जनभागीदारी को भी बढ़ावा दिया गया। राज्य के सभी जिलों में अभियान को मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों तथा सामुदायिक समूहों के सहयोग से घर-घर जाकर स्क्रीनिंग, लक्षणों की पहचान, परामर्श और आवश्यक जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की है। परिणामस्वरूप सभी जिलों ने निर्धारित स्क्रीनिंग लक्ष्य के अनुरूप उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है और बिहार ने समग्र रूप से लक्ष्य का 185 प्रतिशत हासिल करते हुए टीबी उन्मूलन अभियान को नई गति प्रदान की है। यह उपलब्धि भविष्य में टीबी मुक्त बिहार और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मजबूत आधार सिद्ध होगी।

कोई टिप्पणी नहीं: