इंदौर : मनोरंजन नहीं, आस्था का पर्व है गणेशोत्सव-गायत्री कॉलोनी से हुई नई शुरुआत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 22 सितंबर 2026

इंदौर : मनोरंजन नहीं, आस्था का पर्व है गणेशोत्सव-गायत्री कॉलोनी से हुई नई शुरुआत

  • गणेशोत्सव में धार्मिकता की पहल, डीजे गीतों की जगह गूंजेंगे स्तोत्र और आरतियां

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इंदौर, (संवाददाता) ।नगर के गायत्री कॉलोनी, बैडिया के गणेश पंडाल में समिति के वरिष्ठ सदस्य देवराम कर्मा ने पंडालों में बजने वाले आजकल के बिना सिर-पैर के डीजे भजनों को बजाने से मना करते हुए बच्चों और युवाओं को समझाया कि यह धार्मिक पर्व है और पंडाल दस दिनों तक मंदिर के समान है। भगवान के पंडाल में ऐसे डीजे के फुल साउंड में उल्टे-सीधे आधुनिक भजनों पर कूदना या फुल साउंड में बिना सिर-पैर के मनोरंजक गीत बजाना अभद्रता की श्रेणी में आता है। अब से भगवान के पंडाल में भगवान के स्तोत्र, आरतियां, अष्टक और पुराने ओरिजिनल भजन ही बजेंगे। कोई बॉलीवुड गीत भी नहीं बजेगा। इसके साथ ही तुरंत सनातन देवी-देवताओं के मंत्रों, आरतियों, अष्टकों और स्तोत्रों की पेन ड्राइव लाकर परिवर्तन की शुभ शुरुआत भी की गई। भावी पीढ़ी धार्मिक पर्वों को मनोरंजन का माध्यम न बनाए, इसलिए कहीं से तो शुरुआत करनी ही पड़ेगी। गायत्री कॉलोनी निवासी श्रीमती आरती वाघे ने बताया कि हमारी बाल पीढ़ी और युवा पीढ़ी को धार्मिक पर्वों का सही अर्थ समझाना हो तो पहले गलत चीजों पर रोक लगानी होगी। तभी हिंदू धर्म के अंदर आ रही विकृतियां धीरे-धीरे दूर होंगी। पहली शुरुआत म्यूजिक सिस्टम में परिवर्तन से ही करनी होगी, क्योंकि गीत-संगीत का मानव मस्तिष्क पर बहुत प्रभाव होता है।


गलत गतिविधियों के कारण धर्म पर आक्षेप लगता है

गायत्री कॉलोनी, बैडिया के पंडाल में हुए इस परिवर्तन का समर्थन कॉलोनी निवासी दिलीप पटेल, नमन गावशिंदे, धर्माचार्य संजय पाठक, सुरेश कर्मा, हेमंत वाघे, महेश कर्मा सहित सभी कॉलोनीवासियों ने किया। धर्म में आ रही विकृतियां दूर करने और धार्मिक पर्वों में आने वाले कचरे को साफ करने की शुरुआत खुद से ही करनी पड़ेगी। तभी स्वच्छ समाज का निर्माण हो सकता है।

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