सीहोर : युवाओं को हनुमान जी से लेना चाहिए सेवा भाव, नम्रता और ईश्वर भक्ति की प्रेरणा : गणेशानंद महाराज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 19 सितंबर 2026

सीहोर : युवाओं को हनुमान जी से लेना चाहिए सेवा भाव, नम्रता और ईश्वर भक्ति की प्रेरणा : गणेशानंद महाराज

  • कथा में सुनाया हनुमानजी के बाल प्रसंग

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सीहोर । ग्राम नयापुरा  में  भगवान शिव शक्ति नंदन, प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश के जन्मोत्सव के पावन उपलक्ष्य में संगीतमय श्री हनुमंत कथा का भव्य एवं आध्यात्मिक शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस भक्ति, श्रद्धा और आनंद का अद्भुत त्रिवेणी संगम देखने को मिला, जहाँ संपूर्ण क्षेत्र मारुति नंदन के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कथा के प्रथम दिवस कथा वाचक  पंडित गणेशानंद महाराज के मुखारविंद से श्री हनुमान जी के दिव्य जन्मोत्सव एवं उनकी अद्भुत बाल लीलाओं का विस्तारपूर्वक गुणगान किया गया l उपस्थित जनसमुदाय को संदेश दिया कि आज के परिवेश में हनुमान जी के जीवन चरित्र से बालकों और युवाओं को सेवा भाव, नम्रता और ईश्वर भक्ति की प्रेरणा लेनी चाहिए।कथा व्यास पंडित गणेशानंद महाराज ने कथा का शुभारंभ करते हुए हनुमानजी के जन्म की पावन कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता अंजनी और केसरी नंदन के घर भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार के रूप में श्री हनुमान जी का प्राकट्य हुआ। महाराज जी ने भावपूर्ण शब्दों में समझाते हुए कहा:हनुमान जी केवल बल के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे ज्ञान, भक्ति, वैराग्य और सेवा के साक्षात पुंज हैं। उनका जन्म ही अधर्म के नाश और प्रभु श्रीराम के काज को सिद्ध करने के लिए हुआ था। बाल हनुमान द्वारा प्रात:काल उगते हुए भगवान सूर्य को एक मधुर फल समझकर निगलने की प्रसिद्ध लीला का विस्तृत वृत्तांत सुनाया।


जब बाल हनुमान सूर्य देव को ग्रहण करने के लिए आकाश की ओर उड़े, तो तीनों लोकों में हाहाकार मच गया l तदोपरांत देवराज इंद्र के वज्र प्रहार से लेकर पवन देव के कोप और पुनः समस्त देवी-देवताओं द्वारा बाल हनुमान को अमरता, अष्टसिद्धि और अतुलित बल का वरदान देने की गाथा सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे।पंडित गणेशानंदजी महाराज ने अपनी ओजस्वी एवं मधुर वाणी में जब मारुति नंदन के जन्मोत्सव और उनकी बाल लीलाओं पर आधारित भजनों की प्रस्तुति दी l रामजी चले न  हनुमान के बिना इन पावन भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे। संपूर्ण कथा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और जय श्री राम व जय हनुमान के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों के हृदयों में प्रभु के प्रति अगाध श्रद्धा और अपार उत्साह झलक रहा था।

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