- महंत पवनदास महाराज बोले-सनातन धर्म को एकजुट करने का सबसे बड़ा पुनीत कार्य कर रहे हैं पंडित प्रदीप मिश्रा; संतों ने आधुनिक भोजनशाला और भव्य कथा पंडाल का किया अवलोकन
सनातन धर्म को एकजुट करने का पुनीत कार्य कर रहे पंडित प्रदीप मिश्रा
महंत पवनदास महाराज ने कहा कि सनातन समाज को एकजुट रहने, अपनी धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण, यज्ञ, संत समागम और धार्मिक सभाएं सनातन संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा सनातन धर्म को एकजुट करने का सबसे बड़ा पुनीत कार्य कर रहे हैं। उनकी शिव महापुराण कथाओं में समाज के विभिन्न वर्गों के श्रद्धालु एक साथ बैठकर भगवान शिव का नाम स्मरण करते हैं। यह सनातन समाज की एकता का बड़ा उदाहरण है। कुबेरेश्वरधाम में आयोजित होने वाली शिव महापुराण कथा में जिस प्रकार लाखों श्रद्धालु भेदभाव भूलकर एक साथ भगवान शिव की आराधना करते हैं, वह अपने आप में सनातन संस्कृति की शक्ति को प्रदर्शित करता है। उन्होंने इसे सनातन धर्म का सबसे बड़ा कुंभ बताते हुए धार्मिक एकता और सामाजिक समरसता की दिशा में ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।
50 से अधिक साधु-संतों का किया सम्मान
कुबेरेश्वरधाम में आयोजित संत समागम के दौरान विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा और पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सदस्यों ने धाम पहुंचे संत-महात्माओं का स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर महंत पवनदास महाराज, गोपाल दास महाराज, डॉ. शिव सादक, चतुर्नारायण पाराशर सहित लगभग 50 से अधिक साधु-संतों का सम्मान किया गया। संतों ने कुबेरेश्वरधाम में पहुंचकर धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी भी प्राप्त की।
संतों ने आधुनिक भोजनशाला और कथा पंडाल का किया अवलोकन
संत समागम के बाद साधु-संतों ने अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ कुबेरेश्वरधाम परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान संतों ने धाम में निर्मित आधुनिक भोजनशाला का अवलोकन किया। श्रद्धालुओं के लिए बड़े स्तर पर भोजन-प्रसादी की व्यवस्था और सेवा कार्यों की जानकारी भी ली। इसके साथ ही संतों ने एक लाख 80 हजार स्क्वायर फीट के स्थायी कथा पंडाल का भी अवलोकन किया। इतने बड़े स्तर पर श्रद्धालुओं के बैठने और कथा श्रवण की व्यवस्था देखकर संतों ने धाम में होने वाले धार्मिक आयोजनों की व्यापकता की जानकारी प्राप्त की।
मुरली मनोहर मंदिर में संतों ने किए आराध्य के दर्शन
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि साधु-संत कुबेरेश्वरधाम परिसर स्थित मुरली मनोहर मंदिर भी पहुंचे। यहां उन्होंने मंदिर में विराजमान भगवान शिव एवं माता पार्वती, भगवान राम एवं माता सीता तथा भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा के दर्शन किए। संतों ने मंदिर की धार्मिक और आध्यात्मिक व्यवस्था का अवलोकन करते हुए भगवान के दर्शन किए और समाज में सुख, शांति, समृद्धि तथा सद्भाव की कामना की। मंदिर परिसर में संतों की उपस्थिति से श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।
व्यक्ति का मूल्य उसकी संगति से बढ़ता है-पंडित प्रदीप मिश्रा
संत समागम में अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि व्यक्ति का मूल्य उसकी संगति से बढ़ता है। मनुष्य जिस प्रकार के लोगों के संपर्क में रहता है, उसके विचार और जीवनशैली पर भी उसी का प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सदैव अच्छी संगति और श्रेष्ठ विचारों को अपनाना चाहिए। भगवान शिव की शरण में पहुंचने वाला व्यक्ति भी धीरे-धीरे शिवमय हो जाता है। भगवान की भक्ति और सत्संग से उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि अपने जीवन में अच्छे विचार रखने वाले और सकारात्मक सोच वाले लोगों की संगति को अपनाएं तथा नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखें।
शिव परिवार प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक
पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव के परिवार की विशेषता बताते हुए कहा कि शिव परिवार प्रेम, त्याग, समर्पण और स्वीकार्यता का प्रतीक है। देवाधिदेव महादेव के परिवार में विभिन्न स्वरूपों और स्वभावों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। इसी कारण भगवान शिव के परिवार को विशेष रूप से शिव परिवार कहा जाता है। शिव परिवार समाज को एकता, सहिष्णुता और पारिवारिक मूल्यों का संदेश देता है। परिवार में प्रेम और आपसी स्वीकार्यता बनी रहे तो अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना सहजता से किया जा सकता है। भगवान शिव का परिवार प्रत्येक व्यक्ति को मिल-जुलकर रहने और एक-दूसरे का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।
संतों की उपस्थिति से भक्तिमय हुआ धाम
संत समागम के दौरान कुबेरेश्वरधाम का वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय रहा। साधु-संतों के दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए श्रद्धालुओं में भी उत्साह दिखाई दिया। संतों ने सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने, धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को जोड़ने और युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। समापन अवसर पर विठलेश सेवा समिति की ओर से सभी साधु-संतों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। संत समागम ने धर्म, संस्कृति, सेवा और सामाजिक एकता का संदेश देते हुए सनातन परंपराओं के प्रति समाज की आस्था को और मजबूत किया।

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