- जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे, कर्म का सिद्धांत जीवन में सदैव लागू होता है : पंडित प्रदीप मिश्रा
कृष्ण जन्म के साथ गूंजा नंद के घर आनंद भयो
कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया और वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी में लेकर पंडाल में पहुंचे, पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष के साथ भगवान के जन्म का स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु जमकर झूमे और नृत्य किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर पुष्पवर्षा की गई तथा श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं। इसके बाद माखन-मिश्री और मिठाइयों का वितरण किया गया।अधर्म बढ़ने पर भगवान लेते हैं अवतार
पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है और अंधकार छाने लगता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना और अंधकार को दूर करने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान कभी जन्म नहीं लेते, बल्कि भक्तों के कल्याण और धर्म की रक्षा के लिए अवतार धारण कर प्रकट होते हैं। उन्होंने देवकी और वासुदेव के प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि भक्तों के उद्धार के लिए भगवान श्रीकृष्ण को कारागार में प्रकट होना पड़ा। जब जीव साधना के मार्ग पर आगे बढ़ता है तो संसार रूपी हथकड़ियां और पैरों की बेड़ियां टूटने लगती हैं तथा ईश्वर के प्रेम के द्वार उसके लिए खुल जाते हैं।
ईश्वर के प्रति आस्था से मिलता है जीवन में संबल
पंडित मिश्रा ने कहा कि शिव महापुराण, श्रीमद् भागवत कथा, राम कथा सहित सभी धार्मिक ग्रंथों में ईश्वर के प्रति आस्था और समर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। जब तक मनुष्य की ईश्वर के प्रति आस्था बनी रहती है, तब तक उसे आध्यात्मिक संबल मिलता रहता है। भगवान ने विभिन्न अवतारों के माध्यम से मानव समाज को सादगी, समर्पण, प्रेम और सदाचार के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी है। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और कृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर उनकी बाल लीलाओं तथा भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भी विस्तार से वर्णन किया। भगवान के जन्मोत्सव के अवसर पर पूरा कथा पंडाल भक्तिभाव में डूबा नजर आया। शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण करने पहुंच रहे हैं। कथा के साथ श्रद्धालुओं को भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा के दर्शन और आशीर्वचन का लाभ भी मिल रहा है।


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