चन्नी समर्थक यह भी चाहते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए। बघेल के हालिया पंजाब दौरों के बावजूद दोनों खेमों के बीच कोई सुलह नहीं हो सकी और पार्टी के कार्यक्रमों में गुटबाजी लगातार खुलकर सामने आती रही। पायलट सोमवार को 49 वर्ष के हो जाएंगे। उनके सामने न केवल परस्पर विरोधी खेमों को एक मंच पर लाने की चुनौती है, बल्कि उन्हें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल का मुकाबला करने के लिए चुनावी रणनीति भी तैयार करनी होगी। पायलट को यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने को कई लोग चुनावी रणनीति बनाने की उनकी क्षमता और सबको साथ लेकर चलने की उनकी शैली पर पार्टी नेतृत्व के बढ़ते भरोसे के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस पंजाब में वापसी की कोशिश कर रही है और उसने इसके लिए ऐसे नेता पर उम्मीदें टिकाई हैं, जिनके लिए वापसी करना कोई नयी बात नहीं है। वर्ष 2020 में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत का नेतृत्व करने के बाद पायलट एक समय पार्टी में अलग-थलग पड़ गए थे। उन्हें उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था और उन पर भारतीय जनता पार्टी से नजदीकियां बढ़ाने के आरोप भी लगे थे। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा की अहम भूमिका से दोनों पक्षों के बीच सुलह होने के बाद पायलट ने बगावत खत्म कर दी और पार्टी के वफादार नेता के रूप में वापस लौट आए। इसके बावजूद कुछ समय तक उन्हें संदेह की नजर से देखा जाता रहा और उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली।
बाद में उन्हें 2023 में कांग्रेस महासचिव और छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया। हालांकि 2024 के आम चुनाव में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा और वह 11 में से केवल एक सीट जीत सकी लेकिन पायलट को ऐसे सक्रिय प्रभारी के रूप में देखा गया जो लगातार जमीनी स्तर पर मौजूद रहे और सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश करते रहे। उन्हें केरलम विधानसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक भी बनाया गया था, जहां कांग्रेस ने 10 साल बाद बड़ा जनादेश हासिल किया। विधानसभा चुनाव में पायलट के प्रचार अभियान और उनकी भूमिका की काफी सराहना हुई। पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपे जाने को राजस्थान के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई लोग उन्हें 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का सबसे मजबूत नेता मानते हैं। गोविंद सिंह डोटासरा की जगह उन्हें कांग्रेस की राजस्थान इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें भी लगती रही हैं। फिलहाल उन्हें यह पद नहीं मिला है, लेकिन पंजाब की चुनावी जंग जीतने पर यह उनके लिए अगला बड़ा इनाम हो सकता है। पायलट की पहचान सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता की है और उनकी नियुक्ति पर आई शुरुआती प्रतिक्रियाओं में भी इसकी झलक दिखाई देती है। वडिंग, चन्नी, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत पंजाब में कांग्रेस के कई नेताओं ने पायलट को राज्य का प्रभारी महासचिव बनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी ऊर्जा से विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में नया उत्साह आएगा। राहुल गांधी की नयी टीम आकार ले रही है और ऐसे में पायलट एक बार फिर उनके पसंदीदा नेताओं में शुमार होते दिखाई दे रहे हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें