- शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं, वे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य गढ़ते हैं : संस्कार मंच केे संयोजक जितेन्द्र तिवारी
अतिथियों का किया स्वागत-सम्मान
कार्यक्रम के दूसरे दिन संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, कन्या महाविद्यालय की ओर से डॉ. पूजा कश्यप, सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट, संकल्प केन्द्र के आकाश राय एवं अजय मीना सहित अन्य अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर कन्या महाविद्यालय की ओर से उपस्थित डॉ. पूजा कश्यप ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में माता-पिता की सेवा और सम्मान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। स्वयं परमात्मा ने भी माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च कर्तव्यों में माना है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से भी जुड़े रहना आवश्यक है। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि परिवार ही व्यक्ति के संस्कारों की पहली पाठशाला है। बुजुर्ग परिवार की जीवंत धरोहर होते हैं, जिनके अनुभवों से बच्चों और युवाओं को जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की सीख मिलती है।
आज रंगों में रिश्ते के माध्यम से होगा पीढ़ियों का संवाद
संकल्प केन्द्र के संचालक राहुल सिंह ने बताया कि भारत सरकार के आह्वान पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग तथा संकल्प वृद्धाश्रम के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय भव्य संकल्प पीढ़ी संवाद-अनुभव से भविष्य की ओर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और बच्चों के बीच संवाद, अपनापन, अनुभवों का आदान-प्रदान तथा पारिवारिक एवं सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि शनिवार को कार्यक्रम के तीसरे दिन रंगों में रिश्ते विषय पर विशेष आयोजन किया जाएगा। इसमें वरिष्ठजनों और युवाओं के बीच मेरा परिवार-मेरा समाज तथा पहले का जीवन और आज का जीवन जैसे विषयों पर संवाद होगा। वरिष्ठजन अपने जीवन के अनुभवों और पुराने समय की जीवनशैली से जुड़ी यादें युवाओं के साथ साझा करेंगे, वहीं युवा पीढ़ी वर्तमान समय की सोच, जीवनशैली और बदलते सामाजिक परिवेश पर अपने विचार रखेगी।
30 सितंबर को होगा सात दिवसीय कार्यक्रम का समापन
सात दिवसीय कार्यक्रम का समापन 30 सितंबर को किया जाएगा। आगामी दिनों में विभिन्न विषयों पर संवाद और गतिविधियों के माध्यम से पीढ़ियों को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास जारी रहेगा। कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव, युवाओं की ऊर्जा और बच्चों की रचनात्मकता को एक मंच पर लाकर पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का संदेश दिया जा रहा है।

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