कविता : मेरी दुनिया बस इतनी है - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 20 सितंबर 2026

कविता : मेरी दुनिया बस इतनी है

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क्या मेरी दुनिया बस इतनी है?

कि लंबे बाल ही मेरी पहचान हों,

कपड़े और चुन्नी मेरी मर्यादा हों?

क्या जीवन का अर्थ बस इतना है?

लड़की को शादी और घर संभालना है?

क्या मेरे सपनों की कोई कीमत नहीं?

क्या मेरी उड़ानों का कोई आसमान नहीं?

मैं भी दुनिया देखना और मंज़िल पाना चाहती हूँ,

अपना नाम और पहचान बनाना चाहती हूँ,

मैं सिर्फ़ किसी की बेटी, बहन या पत्नी नहीं,

मैं अपनी कहानी की पहली पंक्ति हूँ,

शादी मेरी इच्छा हो तो वह जीवन का हिस्सा है,

पर मेरी मंज़िल सिर्फ़ शादी नहीं है।।




तनुजा भंडारी

उत्तराखंड

गांव की आवाज 

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