Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त): कविता

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प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।
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रविवार, 9 अगस्त 2026

कविता : क्या यही मेरा जीवन है?

कविता : कायर कौन है?

कविता : मन की खामोशी

कविता : नारी सशक्तिकरण

रविवार, 2 अगस्त 2026

कविता : लड़की जैसी साहस नहीं

कविता : पहाड़ की बेटी के सपने

कविता : माहवारी कोई पाप नहीं!

हिंदी कविता : स्त्री हैं तो क्या हुआ?

शनिवार, 16 मई 2026

कविता : मैं होती चिड़िया

कविता : मेरा सपना

कविता : मैं भी वर्दी पहनूँगी

कविता : एक सपना, एक ज़िंदगी

रविवार, 26 अप्रैल 2026

कविता : समय

कविता : घर के मसले

कविता : मेरी डायरी

कविता : खुद की दुनिया बनाई है

शनिवार, 25 अप्रैल 2026

कविता : मेरी दिशा सभा

कविता : मेरा बचपन मेरा गांव

कविता : सुंदर सी मेरी माँ

कविता : बेटी को आगे बढ़ाओ